अनूठा प्रयोग - चन्द्रमा से पाएं अमृतमयी ऊर्जा


सूर्य और चन्द्रमा साक्षात दैव हैं जिन्हें इंसान खुली आँखों से देख सकता है और उनकी सीधी कृपा प्राप्त कर सकता है।
पूर्णिमा की रात चन्द्रमा पर त्राटक करें यानि की खुली आँखों से चन्द्रमा को एकटक देखें। बिना पलकें झुकाए उतनी देर देखें जितनी देर सहजता से देख सकते हैं।
चन्द्रमा के किसी भी मंत्र से 30 बार गहरे तक पूर्ण क्षमता से साँसों का लेना-छोड़ना करें। इससे मंत्र का शरीरस्थ नाडियों में संचरण होगा। इसके बाद जब चन्द्रमा पर त्राटक करें तब नासिका से फेफड़ों में हवा भर लें और जितनी देर साँस फेफड़ों में रहे तब तक चन्द्रमा के किसी मंत्र को मन ही मन जपते रहें। ‘‘ॐ सों सोमाय नमः’’ या चन्द्रमा के किसी भी मंत्र का जप कर सकते हैं।
जब असहजता महसूस हो, तब हवा बाहर निकाल कर फेफड़े पूरी तरह खाली कर दें और साँस को बाहर की तरफ ही रोके रखकर चन्द्रमा के मंत्र से बहिर्कुम्भक प्राणायाम करें। असहजता महसूस हो तब साँस ले लें।
यह सम्पूर्ण क्रिया सहज अवस्था में ही करनी है। ॐ सों सोमाय नमः, या ॐ चन्द्रमसे नमः अथवा किसी भी चन्द्र मंत्र से त्राटक कर सकते हैं।
वैदिक परंपरा के जानकार चन्द्रमा के वैदिक मंत्र जप कर सकते हैं। पूजा के उपरान्त चन्द्रमा को दुग्ध मिश्रित अघ्र्य प्रदान करें तो उत्तम ही है।
यानि की अन्तः कुंभक और बहिर्कुम्भक दोनों अवस्थाओं में मन को एकाग्र करते हुए चन्द्रमा के किसी मंत्र का जप करें। दृष्टि चन्द्र बिम्ब पर बिना पलकें झुकाए टिकी रहनी चाहिए।
जो लोग सीधे चन्द्रमा को देखकर इस प्रयोग को करने में असहजता का अनुभव करते हैं वे किसी पात्र में पानी भरकर पानी में चन्द्रमा के बिम्ब को देखकर यह प्रयोग करें। यह प्रयोग खड़े-खड़े या बैठे हुए किसी भी अवस्था में किया जा सकता है।
यथाशक्ति चार-पाँच मिनट तक यह प्रयोग करें। हर पूर्णिमा को भी कर सकते हैं। यह भावना करें कि चन्द्रमा से सूक्ष्म रश्मियां या अमृत की फुहारें हमारे शरीर में प्रवेश कर रही हैं।
इससे चन्द्रमा की सीधी किरणें अमृत रश्मियों के साथ पूरी ऊर्जा से अपने शरीरस्थ चक्रों को पॉवरफुल बनाती हैं और स्वयं को अनुभव होता है कि अपने शरीर के चारों तरफ दिव्य एवं शुभ्र आभामण्डल का निर्माण होने लगा है।
इस प्रयोग से मनोकामना सिद्धि एवं आरोग्य की प्राप्ति होती है तथा मन स्थिर रहता है, क्रोध और चंचलता समाप्त हो जाते हैं और मनमाफिक कार्य संकल्प से ही सिद्ध होने लगते हैं। इससे अपार मनः शान्ति, आरोग्य और आत्मतोष प्राप्त होता है। चेहरा सुन्दर होकर लावण्य प्राप्त होता है।
चन्द्रमा को प्रभावी व बली बनाना हो तो शुक्ल पक्ष की द्वितीय से यह प्रयोग शुरू करें और रोजाना चन्द्रमा के दर्शन करते हुए पाँच से सात मिनट तक यह अभ्यास करें। इस प्रयोग को करते रहने से हमारे शरीर के चारों ओर एक श्वेत और मोहक ओरा बनने लगता है जिसका हमें प्रत्यक्ष अनुभव होता है। लगातार प्रयोग होते रहने से सामने वाले के मन की थाह भी सहजता से पायी जा सकती है।
जन्मकुण्डली में जिन लोगों का चन्द्रबल कमजोर है, मन स्थिर नहीं रहता, उनके लिए यह अच्छा प्रयोग है।
पूर्णिमा को आयु वृद्धि और आरोग्य पाने यह करें
पूर्णिमा की रात को पानी में चन्द्रमा के बिम्ब को देखते हुए श्रद्धापूर्वक ललिता सहस्रनाम का पाठ किया जाए तो आयु-आरोग्य में वृद्धि होती है। इसे आयुष्कर प्रयोग कहा गया है। यह प्रयोग प्रत्येक पूर्णिमा को करने पर चन्द्र बिम्ब में देवी ललिता के दर्शन भी हो सकते हैं।
