साहित्यिक यात्रा में वापस
साहित्य
8 min read

व्यंग्य - महात्मा गांधी का यह अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्तान

Deepak Acharya
Deepak Acharya
April 10, 2025
व्यंग्य - महात्मा गांधी का यह अपमान, नहीं सहेगा हिन्दुस्तान

प्रायःतर देखा गया है कि वैवाहिक प्रोसेशन और अन्य मांगलिक आयोजनों, उत्सवों में नोट उछाल कर समृद्ध और दानी होने का पाखण्ड किया जाता है। वास्तविक धनी मानी इन आयोजनों में असली नोट उछालते हैं और अधिकांश लोग अपने आपको वैभवशाली बताने की गरज से नकली नोटों की बारिश करते रहते हैं। कभी दूल्हे के सिर से फिरा कर, तो कभी नचनिया लोगों के सर पर फिरा या सर पर नोटों की बारिश की जाती है। ये नकली नोट उन सभी रास्तों पर सड़क पर बिखरे रहते हैं और कचरे की तरह यत्र-तत्र बिखरे रहकर स्वच्छता को भंग करते हैं। हवा से उड़ कर आस-पास की नालियों में चले जाते हैं।

हैरत की बात तो यह है कि इन नकली नोटों पर भी महात्मा गांधी की छवि अंकित रहती है और रास्ते भर गांधीजी के फोटो वाले नोट कचरे की तरह पड़े रहते हैं, और राहगीरों के पैरों तले तथा वाहनों के टायरों से कुचले जाते रहे हैं।

दशकों तक एक ही परिवार को सत्ता की मास्टर की सौंपने की कृपा और आशीर्वाद वृष्टि करने वाले हमारे देश के राष्ट्रपिता के रूप में पूज्य महात्मा गांधी के फोटो वाले नोट की यह दशा पूरी दुनिया के लिए दुर्भाग्यजनक है।

अहिंसा के पुजारी और राष्ट्रभक्ति के मामले में ब्रह्माण्ड भर में युगों तक लोकप्रिय रहने वाले अमर युगीन व्यक्तित्व हमारे युगीन भगवान महात्मा गांधी का यह सरासर और घोर अपमान है।

उन्हीं महात्मा गांधी ने अहिंसा का संदेश देकर बिना किसी खून-खराबे के केवल चरखे के बूते हमें आजादी दिलाई। तभी उनकी प्रशस्ति में हम कहते हैं - दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल, साबरमती के संत तुने कर दिया कमाल।

मात्र एक व्यक्ति ने अहिंसा, शान्ति और तटस्थ भाव से पूरे राष्ट्र को बिना किसी अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग से स्वतंत्रता दिला दी हो, ऐसा कोई उदाहरण पुराने किसी युग में कभी नहीं देखा गया। इस मामले में सतयुग, त्रैता और द्वापर को भी पछाड़ दिया है कलियुग ने, जहाँ महात्मा गांधी ने यह कर दिखाया।

जिन बापू ने हमें एक गाल पर थप्पड़ पड़े तो दूसरा गाल सामने कर दो, कहकर सहनशीलता की पराकाष्ठा से परिचित कराया, सर्वधर्म समभाव का पाठ पढ़ाकर आज हमारे देश को सेकुलर राष्ट्र के रूप में स्थापित किया, साम्प्रदायिक सद्भाव और सौहार्द के लिए हिन्दुओं को समझाइश कर शान्त किए रखा।

जिन गांधीजी ने गांधी नाम को अमर करते हुए विधाता प्रदत्त असली डीएनए और परम्परागत सरनेम की प्रतिष्ठा को धकिया कर कई पीढ़ियों को अपना सरनेम देते हुए सत्ता सुख से निहाल किया, और आज भी विदेशी आकाओं की कठपुतलियां के रूप में गांधी परिवार गांधी नाम को भुनाता हुआ आगे बढ़ रहा है।

इस परिवार की देशभक्ति का गान भारतीय भले न करें, मगर दुनिया में इनके अपार ज्ञान, असीमित क्षमताओं और स्वामीभक्ति का कीर्तिगान खूब होता रहा है। हम जैसे नैष्ठिक गांधीवादी जितने अपने माँ-बाप के प्रति वफादार नहीं हैं, उतने इस परिवार के प्रति कृतज्ञ, उपकृत और स्वामीभक्त हैं।

जिन महात्मा गांधी ने बैरिस्टर होते हुए भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव से लेकर किसी भी क्रान्तिकारी का केस नहीं लड़ा और विधि के विधान को सर्वोपरि मानकर तटस्थ बने रहकर द्रष्टा भाव को अपनाया, अंग्रेजों के आतिथ्य को स्वीकार करते हुए निर्मोही और अनासक्त भाव का दिग्दर्शन कराया, सत्य के प्रयोग करते हुए दुनिया को नई दिशा-दृष्टि देकर अपने अनुयायियों को भी सत्य के प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया, और आज तक उनके अनुचर इस पर कायम हैं।

ऐसे महात्मा गांधी के फोटो और नोट का अपमान हिन्दुस्तान सहन नहीं करेगा। इन नोटों की बिक्री और सड़कों पर उछालने की दुष्प्रवृत्ति पर तत्काल प्रभाव से लगाम लगाई जानी चाहिए।

आज भले ही गांधी के नाम पर दशकों से सत्ता सुख भोगते रहने वाले नेताओं ने गांधी नाम को एक परिवार तक ही सीमित करते हुए अपनी पूरी की पूरी श्रृद्धा और विश्वास इस परिवार के प्रति उण्डेलते हुए गांधी भक्ति के भावों को जिन्दा रखा हो, लेकिन हम जैसे कट्टर गांधीवादियों के लिए हमारे आदर्श, पितर एवं दादा पुरुष, मार्गदर्शक और दुनिया में शांति के प्रतीक बने हुए सत्तासुख पाने के लिए मूर्तमान मंत्र बने हुए महात्मा गांधी का अपमान सहा नहीं जा सकता।

गांधी के नाम पर फ्री-स्टाईल सब कुछ कर गुजरने वालों ने गांधी टोपियों को तिलांजलि दे दी है मगर जहाँ कहीं राजसत्ता की बात आती है वहां गांधी टोपी को कटोरे की तरह सामने रखकर वोटों की भीख मांगने लगने से पीछे नहीं रहते।

अब ये गांधी टोपियां कटोरों के रूप में उनके दिल-दिमाग में घुस चुकी हैं। ऐसी अगाध आस्था ब्रह्माण्ड में कहीं और दिखने में नहीं आती। हमने गांधी टोपी पहनकर गांधीवादी होने की नौटंकी कभी नहीं की, मगर गांधी और गांधी छाप के इतने बड़े भक्त, प्रशंसक और आस्थावान हैं कि इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते।

ये हमारे लिए प्राणवायु हैं, न मिलें तो इस संसार से मोह ही समाप्त हो जाए। इस कारण से घरों में इनका अधिक से अधिक संग्रहण करते रहते हैं ताकि प्राणवायु का संकट आ जाने पर इनका उपयोग करते हुए देश की सेवा कर सकें।

हम सभी कट्टर गांधीवादियों, गांधीवादी विचारकों, गांधी दर्शन के अनुगामियों से लेकर गांधीजी के प्रति तनिक भी श्रृद्धा रखने वालों का फर्ज है कि नकली नोटों को उछालकर उत्साह और आनंद दर्शाने के हालातों पर पाबन्दी लगाई जाए।

गांधी हमारी जीवन पद्धति है, गांधी छाप हमारा जीवन।

जब तक सूरज-चाँद रहेगा, गांधी तेरा नाम रहेगा।

महात्मा गांधी जिन्दाबाद, गांधीछाप अमर रहे।

( हम जैसे सभी असली और कट्टर गांधीवादियों की ओर से विनम्र अपील)