
हरियाली भरा परिवेश तन-मन को सुकून देने के साथ ही जीवन के हर पहलू में सुख-समृद्धि लाता है। पानी और हरियाली का अपना अलग ही आकर्षण है। जो इन्हें देखता है उसे तत्क्षण सुकून व आत्मतोष मिलने लगता है।
हरियाली भरे परिवेश में जीवन को आनंद देने वाले रंगों और रसों की भरमार हुआ करती हैं। आज हमारे जीवन में रसहीनता, गंधहीनता और जड़ता आ गई है। इसका मूल कारण ही यह है कि हम नैसर्गिक रसों के अखूट भण्डार से दूर होते चले जा रहे हैं। जिस तेजी से ये दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं उतना ही हमारा जीवन नीरस होता जा रहा है।
हरियाली जीव मात्र को प्रिय होती हैं चाहे वह पशु हो या इंसान। हरियाली सुकून देने के साथ ही जबर्दस्त आकर्षण भी जगाती है। किसी भी भवन की शाश्वत सुन्दरता उसके आस-पास के हरियाले परिसरों से प्रतिबिम्बित होती है। और यह हरियाली भरे परिवेश की सघनता और बेहतर विन्यसन पर निर्भर करती है।
असली छाया तो पेड़-पौधों की ही होती है। हम अपने भवनों का नाम भले ही मातृ छाया, पितृ छाया आदि कुछ भी रख लें, ये सब छायाएँ आभासी होती हैं जबकि प्रत्यक्ष छाया का सुख तो इन पेड़ों से ही मिलता है। स्थानीय से लेकर देश-विदेश तक में इन्ही प्रकृति पुत्रों की मौजूदगी हर किसी के चरम आकर्षण का केन्द्र होती है जो हमेशा आनंद के महास्त्रोत के रुप में उल्लास का महासागर उमड़ाते रहते हैं।
इसलिए अपने घरों की शोभा बढ़ाना चाहें तो खाली जमीन की उपलब्धता होने की स्थिति में हरियाली लाने पर ध्यान दें। घास के छोटे-बड़े बगीचे से लेकर जगह और जलवायु तथा वास्तु के अनुकूल पादप लगाएं। बेहतर यह होगा कि जिस दिन अपने घर की नींव डालने का मुहूर्त हो उसी दिन भूमि की उपलब्धता और आबोहवा के अनुकूल उपयुक्त पेड़-पौधे लगायें अथवा अपने आवासीय/वाणिज्यिक भवनों का काम शुरू करने के साथ ही पेड़-पौधे लगाएं।
पौधारोपण के लिए शुक्ल पक्ष में शुभ मुहूर्त लें। इसके लिए रसों का देवता चन्द्रमा बली होना चाहिए। गुरु या रवि पुण्य योग होना और अधिक उत्तम माना जाता है। पौधे लगाने से पूर्व भूमि पूजन करें। इससे पौधे के सुरक्षित पल्लवन व पुष्पन में आड़े आने वाले दोषों की निवृत्ति हो जाती हैं।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पौधे लगाने का काम पवित्र होकर करना चाहिए। अपने परिसरों में खुद पौधारोपण करें अथवा अपने परिवार के लोगों के हाथों पौधारोपण होना चाहिए। पौधारोपण स्थल पर आस-पास दूर्वा, तुलसी आदि भी लगाएं।
भ्रष्ट, बेईमान और मलीन बुद्धि वाले व्यभिचारी और पापी लोगों के हाथों रोपे जाने वाले पौधे कुछ समय बाद स्वतः नष्ट हो जाते हैं। इसलिए शुद्ध चित्त वाले व पवित्र बुद्धि वाले लोगों के हाथों ही पौधों का रोपण होना चाहिए, तभी पौधों की वृद्धि, सुरक्षित पल्लवन और विकास तेजी से हो पाता है। अन्यथा दुष्ट एवं अभिशप्त हाथों में हुआ पौधारोपण ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाता और उनके हाथों से लगाए जाने वाले पौधे असमय काल कवलित होकर श्राप देते हैं। रात को पौधारोपण नहीं करना चाहिए।
आज हम सभी से लेकर सरकारों, संस्थाओं, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और भवन एवं कॉलोनियों के निर्माताओं को यह प्रयोग व्यवहार में उतारना चाहिए कि जहां कहीं निर्माण हो, वहां इसके साथ ही पौधारोपण भी हो। भवन निर्माण शुरु होने के साथ ही पौधारोपण कर देने का फायदा यह होता है कि इनकी सुरक्षा व नियमित सिंचाई तथा देख-रेख के लिए पृथक से व्यवस्थाएँ नहीं करनी पड़ती बल्कि ये काम आसानी से बिना किसी अतिरिक्त खर्च के आसानी से होते रहते हैं।
इसके साथ ही भवन निर्माण पूरा होने तक ये पौधे पर्याप्त ऊँचाई और सघनता पा जाते हैं तथा भवन के वास्तु(नांगल), लोकार्पण या उद्घाटन का दिन आने तक भवन का स्वरूप नैसर्गिक रंगों से कुछ अलग ही निखरा हुआ दिखने लगता है।
हरियाली से लक-दक ऐसा सुंदर माहौल भवन देखने वालों को हर्षाए बिना नहीं रह सकता। यह परिवेश कई सारी नकारात्मक ऊर्जाओं को स्वतः नष्ट कर देता है और इससे भवन में रहने या व्यवसाय करने वालों को ताजगी, सुकून और बरकत का अहसास हमेशा बना रहता है और ये भवन उत्तरोत्तर तरक्कीदायी साबित होते हैं।
भवनों के शिलान्यास के साथ ही पौधारोपण ही यह परम्परा घरेलू के साथ ही निजी व सरकारी क्षेत्र में भी लागू हो जाए तो हमारा हर क्षेत्र हरियाली से इतना भर जाए कि हर कोई वाह-वाह कर उठे। इसके लिए केन्द्र और राज्य सरकारों के साथ ही वन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग और विभिन्न निर्माण से संबंधित विभागों, एजेंसियों व कंपनियों को पहल करनी चाहिए। पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े लोगों और संस्थाओं के साथ ही सामाजिक संस्थाओं, समाजों, स्वयंसेवी संगठनों से लेकर आम लोगों तक को इसमें भागीदारी निभाने आगे आने की आवश्यकता है।
भवन स्वामी की जन्म राशि व नक्षत्रों के अनुसार यदि पौधे लगाए जाएं तो इसका और भी अधिक शुभकारी और बढ़िया प्रभाव देखा जा सकता है। हम जहाँ रहते हैं, जहाँ नौकरी या काम-धन्धा करते हैं वहाँ जगह की उपलब्धता होने पर पर्याप्त पेड़-पौधे लगाने के लिए आगे आना चाहिए। पौधारोपण भी हो तथा साथ में घास के छोटे-छोटे लॉन भी विकसित करने चाहिएं। पौधारोपण का कर्म ऐसा पुण्यदायी है कि जीते जी हमें अर्से तक याद किया जाता है और मृत्यु के उपरान्त इससे प्राप्त पुण्य से हमारी ऊर्ध्वगति भी होती है।

