समाप्त हो जाएगा कांग्रेस का कुनबा


चुनाव चिह्न ही घोर अभिशाप है इस पार्टी के लिए
कांग्रेस को जो पाना था वह पिछले दशकों में आशा-अपेक्षाओं और क्षमताओं से अधिक पा चुकी है। अब इस पार्टी को कोई भविष्य नहीं दिखता। और इसका सबसे बड़ा कारण है इसका चुनाव चिह्न - पंजा।
सामुद्रिक दृष्टि से गहनतापूर्वक देखा जाए तो यह पंजा हर दृष्टि से दुर्भाग्यशाली हाथ ही कहा जा सकता है। केवल पंजे के बूते कांग्रेस चुनावी वैतरणी पार नहीं कर सकती।
इससे जुड़े नेताओं और साथी दलों के सम सामयिक ग्रह गोचर और पुरखों के बचे-खुचे पुण्यों का सारा फल अब तक कांग्रेस पूरी तरह भोग चुकी है, आगे अब संभावनाएं खत्म होती दिख रही हैं। अकेले अपने दम पर यह पार्टी कभी भी राजसुख को प्राप्त नहीं कर पाएगी।
इसके चुनाव चिह्न पंजे से भाग्य, यश और प्रगति की महत्त्वपूर्ण रेखाएं नदारद हैं और जिस ‘‘हाथ’’ का प्रचार किया जा रहा है, उसकी हस्तरेखाओं से दुर्भाग्य की ही झलक मिल रही है। ज्योतिषीय और सामुद्रिक रहस्य विधाओं से इस चुनाव चिह्न का विश्लेषण किया जाए तो इस प्रकार के राजसुख विहीन दुर्भाग्यशाली चुनाव चिह्न के सहारे कांग्रेस का अकेले ही चुनावी वैतरणी पार कर पाना कांग्रेस के भाग्य में ही नहीं है।
इस चुनाव चिह्न हाथ से भाग्य रेखा और यश - प्रतिष्ठा रेखा (सूर्य रेखा) पूरी तरह गायब है, हृदय रेखा विखण्डित हो गई है, जीवन रेखा भी दुर्भाग्य को इंगित करने लगी है।
इस चुनाव चिह्न में राज योग होने का कोई चिह्न नज़र नहीं आता। न ही इसमें कोई भी एक चिह्न है जो सौभाग्य का सूचक हो। इस प्रकार की हस्तरेखा वाले चुनाव चिह्न के सहारे कांग्रेस के लिए सत्ता सुख पाने का स्वप्न कभी पूरा नहीं हो सकता और पार्टी के लिए आने वाला समय विडम्बनाओं से भरा हुआ रहेगा।
कांग्रेस के चुनाव चिह्न के आधार पर सटीक विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि इस‘‘हाथ’’ से जीवन रेखा अब सिमट गई है। यह अन्त में सर्प जिह्नाकार हो चली है जिससे जितने वर्षों का सत्ता सुख बदा था वह पूरा हो चुका है। अब यह आगे जारी नहीं रह सकेगा।
इसके नेताओं के तत्कालीन ग्रह-गोचर और दूसरी पार्टियों के ग्रह-नक्षत्रों के सहारे इसे अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए निरन्तर प्रयास करने की आवश्यकता हमेशा रहेगी। लेकिन अब इसका पूरा कुनबा धीरे-धीरे सिमटता हुआ कुछ समय बाद अस्तित्व को खो देगा। इसके नेताओं द्वारा किए जाते रहे धर्मविरूद्ध कृत्यों और अभिव्यक्ति के पापों का भी कुफल पार्टी को गर्त में ले जाने के लिए सहयोगी की भूमिका में बना हुआ है।
इसमें हृदय रेखा विखण्डित हो चली है और इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि पार्टी की जो असली पहचान रही है उससे वह भटक चुकी है इससे इसके नेताओं का आत्मविश्वास भी डगमगाता रहने लगा है। इस चुनाव चिह्न में हृदय रेखा गुरु पर्वत के पार जाने की दिशा में है, जो पार्टी के अंदरूनी छल, ठगी, धोखाधड़ी और भीतरघात आदि की द्योतक है।
कांग्रेस के इस हाथ में भाग्य रेखा का कहीं अता-पता नहीं है और ऐसे में भाग्य रेखा के बगैर राजयोग मिलना संदिग्ध है। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार भाग्यरेखा हीन हस्त वाले भटकाव के रास्ते पर ही रहते हैं और दुर्भाग्य उनका साथ कभी नहीं छोड़ता।
इस हाथ में मस्तकरेखा चन्द्र पर्वत की ओर अधिक झुकी हुई है जो चिन्ता की प्रतीक होकर रात-दिन उलझनों में घसीटती रहती है और अन्ततः डूबो देती है। बुद्धि, यश, सम्पदा और प्रतिष्ठा की सूचक सूर्य रेखा का पूरी तरह अभाव है। मणि बंध रेखा कटी-फटी है। ऐसी मणिबन्ध रेखाओं वाला अल्पजीवी होता है। ऐसे में कांग्रेस की आयु अब समाप्त हो चली है।
इस हाथ में जीवन रेखा से मस्तक रेखा का उद्गम पृथक से हुआ है। ऐसी रेखा वालों में कार्य के प्रति उदासीनता, ढीली-ढाली नीति, सुस्ती तथा हर क्षेत्रा में मंथर गति प्रमुख लक्षण हैं।
ऐसी हस्तरेखा के योग वालों के भाग्य का सूर्य अस्त ही हो जाता है। ज्योतिषीय आकलन के अनुसार यह चुनाव चिह्न अपनी दुर्भाग्य रेखाओं के कारण कांग्रेस को अब सत्ता सुख कभी नहीं दिला सकेगा। यह समस्त आकलन और निष्कर्ष ज्योतिषियों, हस्तरेखाविदों आदि से सम्पर्क कर एकत्रित किया गया है।
