कोरोना से बचाव के लिए आजमाएं - सूर्य से पाएं रोग निवारण की शक्ति


प्रभातकालीन अरुणिम सूर्य अपार ऊर्जा का महास्रोत है। इस समय सूर्य के सम्मुख कुछ क्षण श्रद्धापूर्वक बिता लिए जाएं और भगवान भास्कर को प्रणाम कर जो भी प्रार्थना की जाए, वह स्वीकार होती है।
उदयकालीन सूर्य के दर्शन के समय किसी भी सूर्य मंत्र से सूर्य बिम्ब पर बाहरी और अन्तः कुंभक करते हुए प्राणायाम के साथ त्राटक किया जाए तो सूर्य की कृपा का अनुभव सप्ताह भर के भीतर होने लगता है।
प्राणायाम सहित त्राटक की अवधि आधे मिनट से शुरू कर यथाशक्ति बढ़ाते हुए 5 से 10 मिनट तक ले जाएं। लेकिन यह याद रखें कि सूर्य जब उदय हो रहा हो, तभी यह प्रयोग करें।
इससे सूर्य की रश्मियां हमारे शरीरस्थ चक्रों में आकर संग्रहित होती अनुभवित होती हैं और अपने शरीर के चारों तरफ ओज-तेज से परिपूर्ण दैवीय कवच का निर्माण होता है जो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से हमें आंशिक रूप से मुक्त कर हल्कापन देता हुआ रक्षा कवच के रूप में महसूस होता है।
सूर्य की कृपा होने पर इस प्रयोग से सूर्य रश्मियों से ही शरीर को पौष्टिकता प्राप्त हो जाती है। ऎसे साधक को भूख-प्यास और गर्मी का अनुभव नहीं होता। साथ ही पूर्वाभास और प्रत्युत्पन्नमति की क्षमताएं विकसित हो जाती हैं। इससे शरीर का ओज-तेज व प्रभाव बढ़ता है तथा आँखों की रोशनी में आशातीत लाभ मिलता है।
वर्तमान में कोरोना महामारी से बचाव की दृष्टि से यह अच्छा प्रयोग है। सूर्य की किरणें किसी भी प्रकार के वायरस और बैक्टीरिया सहित नकारात्मक प्रभावों को चन्द क्षणों में नष्ट कर देने में सक्षम हैं।
