आलपिनों का उपयोग करें मगर संभल कर


बात है बहुत छोटी सी, किन्तु है सौ टके सही। अपने दफ्तर/घर/दुकान/प्रतिष्ठान में आने वाले कागजों पर लगी आलपिनों का उपयोग जहां तक संभव हो न करें।
कोई कागज आपके पास आता है और उसे अपने घर/आफिस में ही रखे रखना हो तो उस स्थिति में उनमें लोहे की पिने, आलपिनें या यू पिनों को हटा कर कूड़ादान के हवाले कर दें और उनकी बजाय अपने दफ्तर/घर की आलपिन या पिनें लगाएं।
बाहर से अपने पास आने वाली आलपिनोंं या दूसरी पिनों को अपने पास रखे रहने से शनि दूषित होता है और इससे कामकाज में बाधाएं आती हैं। बाहर से आने वाली आलपिनें शनि का दुष्प्रभाव पैदा करती हैं। जंग लगी आलपिनों से खतरा अधिक बढ़ जाता है।
इन बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए जरूरी है कि बाहर से अपने पास आने वाले कागजों पर लगी पुरानी पिनों को अपने से दूर कर दें। बाहर सें आने वाले कागजों पर लगी ये पिन्स महीन कीटाणुओं(बैक्टीरिया) से संक्रमित और गंदगी से दूषित होती हैं तथा इनके स्पर्श से अपनी सेहत को भी नुकसान हो सकता है।
अक्सर लोग आलपिनों से अपने कान और दाँत आदि साफ करते हैं और फिर उन्हीं आलपिनों का कागजों को नत्थी करने में उपयोग कर लिया करते हैं। और गंदी आलपिन लगे ये कागज एक से दूसरी जगह पहुंचते रहते हैं। यह स्थिति संक्रमण को बढ़ावा देती है।
यों भी यह इंसान की फितरत में है कि वह कभी बिना कुछ किए नहीं रह सकता। किसी दफ्तर या प्रतिष्ठान में बैठा हुआ भी फुरसत के क्षण में चाबी हिलाएगा, कागजों को इधर-उधर करेगा, टेबल पर पड़ी सामग्री, पेपरवेट और पेन-पेन्सिल को हिलाता-डुलाता रहेगा। आलपिन को हाथ में लेकर कुछ न कुछ कुरेदता रहेगा, दाँतों में लगाएगा या फिर कान में घुसा कर मैल निकालने का जतन करता रहेगा।
इसी प्रकार यदि जमीन-जायदाद या महत्वपूर्ण कागजों से संबंधित कोई काम नहीं हो रहे हों तो उनमें लगी लोहे ही पुरानी आलपिनों को निकाल दें, अपनी कमाई से खरीदी हुई नई आलपिनें लगा दें और इन दस्तावेजों को एक बार सूरज को दिखा दें। इससे काम में गति आ जाएगी। एक बार आजमा कर देखियें।
