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मूँछ पर गर्व करें या पूँछ पर इतराएँ, पसंद अपनी-अपनी

Deepak Acharya
Deepak Acharya
April 2, 2025
मूँछ पर गर्व करें या पूँछ पर इतराएँ, पसंद अपनी-अपनी

मूँछपर गर्व करेंया पूँछ परइतराएँ, पसंद अपनी-अपनी

संसार में उदासीनों और यथास्थितिवादी जड़ लोगों को छोड़ दिया जाए तो दो तरह के ही दोपाए हैं।

एक अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर कर्मयोग में सफलता पाकर गर्व करने वाले। इनका अपना कोई आका या गॉड (फादर/मदर/ब्रदर/सिस्टर/लवर) नहीं होता बल्कि जो कुछकरते हैं अपने बूते पर ही। और दूसरे हैं नाकारा पुरुषार्थहीन,

जिनके पास कमा-खाने से लेकर दुनिया में कुछ भी कर गुजरने का माद्दा नहीं होता।

ऎसे लोग कभी अपनी पूँछ के दम पर इतराते फिरते हैं। कभी औरों की पूँछ को सहलाते हुए मनचाहा सुख और ऎश्वर्य प्राप्त कर लिया करते हैं

और कभी अपनी ही पूँछ को आकाओं के सामने चँवर की तरह हिलाते रहते हुए प्रशस्तिगान या महिमावाचन करते रहते हैं।

गलती या किसी अनजाने पुण्य से इंसान की खोल पा चुके इन मूर्ख परजीवियों और पराश्रितों के लिए ऎसा करना मजबूरी है

क्योंकि ऎसा न करें तो बेचारे कुपोषण के मारे भूखों ही न मर जाएं।

दम नही रहेगा तो ये दुम किसी काम नहीं आएगी,

चाहे यह अपनी हो या परायी दुम ...

पूछल्ले जिन्दगी भर पूछल्ले ही बने रहते हैं, चाहे वे कितनेही बड़े काले-सफेद हाथियों के पीछे चलते रहें या हिरणों और गधों पर

सवारी करते हुए परिभ्रमण का आनंद लेते रहें।

न पूछल्ले सुधर सकते हैं न उनकी पूँछ। यह पूँछ मरते दम तक टेढ़ी ही रहा करती है और मरने के बाद भी पूँछ की पहचान

करते हुए इन्हें अगली योनि में पूछल्ले का जिस्म ही नवाजा जाता है।

अपने आस-पास और साथ भी ऎसे खूब सारे पूछल्ले हैं जो चटखारे लेकर जी रहे हैं,

न जानेक्या-क्या चाटने में मस्त हैं, कहाँ-कहाँ चाट लिया करते हैं।

इन्हेंयह भी नहीं पता कि ये वो ही सब कुछ कर रहे हैं जिसे इनके पूर्वज हेय और वर्जित मानते रहे हैं।

दुनिया भर के पूछल्लों की यही हालत है। जहाँ चाटने-चटवाने का आनंद मिल जाता है, वहीं दुम हिलाने लगते हैं

और अपनेआपको दमदार समझते हुए धींगामस्ती करते रहते हैं।

इनके अलावा इन बेचारों के पास जीने और अपने वजूद को साबित करने का कोई और रास्ता ही नहीं है।

यह दुम ही तो है जिसमे सहारे ये औरों को हवा करते हुए जी रहे हैं। अन्यथा ये कुपोषण के मारे दम ही तोड़ दें।

अपने आस-पास भी ऎसेखूब सारे जानवरी अंधानुचर हैं जो पूरी की पूरी जिन्दगी अपनी और परायी पूँछ के भरोसे कर चुके हैं।

पसन्द अपनी है। गर्व करने लायक जीवन जीने का माद्दा बनाए रखें अथवा लानत भरी मजबूर जिन्दगी।