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साहित्य
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अटूट रिश्ता

Deepak Acharya
Deepak Acharya
June 16, 2023
अटूट रिश्ता

वाकई कितना गहरा और अटूट रिश्ता है -

आँख, कान, नाक और गले का।

कोई सुनता ही नहीं हमारी बात

जब तक अपनी आँखों से देख न ले गांधी छाप,

या कि तर न कर ले हलक पसंदीदा पेय से,

तभी तो सूँघ कर करते हैं वे ही काम,

जिनमें होता है मनभावन गँध का अहसास।

अब तो मान ही लो

कि आम इंसान से कहीं ज्यादा क्षमताएँ होती हैं

भिखारियों में - चाहे छोटे हों या बड़े,

फुटपाथी हों या दफ्तरी

कुर्सीनशीन हों या गद्दीनशीन