बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी....


उन दिनों आजकल के नेताओं की तरह कुटिलता, दोहरा-तिहरा-बहुरा चरित्र, द्वेष और पारस्परिक वैमनस्य नहीं हुआ करता था।
हर अवसर पर गांभीर्य से कर्तव्य कर्म के निर्वहन के साथ ही मनोविनोद और आत्मीय माधुर्य झलकता भी था और छलकता भी। इससे माहौल भी आनंद से भर उठता था और चर्चाओं का दौर जो भी सुनता-देखता, वह भी मस्ती से भर उठता था।
बात कुछ दशक पुरानी है। उन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरिदेव जोशी जी, कांग्रेस के शीर्षस्थ नेताओं श्री प्रभाशंकर पण्ड्या जी, श्री नटवरलाल भट्ट जी और बीडीओ साहब नाम से मशहूर श्री देवशंकर त्रिवेदी जी के चुनावी दौरों, सभाओं, शिलान्यास एवं उद्घाटन कार्यक्रमों का दौर चलता ही रहता।
ग्रामीणों के बीच सामूहिक भोज का भी उन दिनों अलग ही आनन्द रहता। तब लगता था कि इन नेताओं के आगमन पर कोई बड़ा गाँवाई उत्सव ही हो रहा हो। पर अब ये बातें इतिहास हो चली हैं। कई अवसरों पर श्री दिनकरलाल मेहता और दूसरे बड़े नेता भी इनके साथ रहा करते।
उन्हीं दिनों की बात है। जब ये गणनायक चतुष्टय किसी बड़े गांव में कार्यक्रम के बाद ग्रामीणों के समूहों के साथ सामूहिक भोज में शामिल हुए।
वहाँ परोसगारी करने वाला जब भी मिठाई लेकर परोसने आता, कोई न कोई कह देता- अरे..अरे..। और यह सुनते ही वह बिना परोसे वापस मुड़ जाता।
इस पर भट्ट साहब एवं बीडीओ साहब ने उसे वापस बुलाया और मनोविनोद करते हुए कहा- पूरी बात सुन तो सही। हम कह रहे हैं कि जो लाए हो परोस दो, खा लेंगे।
इस मजेदार घटना के बारे में बताया कांग्रेस के नेता एवं बांसवाड़ा नगर परिषद के पार्षद रहे आत्मीय मित्र भाई श्री विमल भट्ट ने।
इन चारों के साथ के और माधुर्य का प्रपात छलकाने वाले ऐसे कई रोचक और मजेदार किस्से समय-समय आपको परासते रहने का प्रयास करते रहेंगे।
(फोटो सौजन्य- भाई श्री शैलेन्द्र भट्ट से साभार)
