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साहित्य
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राज-काज का रायता - कंट्रोल रूम की काँव-काँव

Deepak Acharya
Deepak Acharya
March 6, 2025
राज-काज का रायता - कंट्रोल रूम की काँव-काँव

सरकार के ब्लॉक, उपखण्ड और जिला कार्यालयों में लगभग साल भर ही कंट्रोल रूम का संचालन होता है। कभी चुनाव, परीक्षाओं के नाम पर, कभी आपदा या बाढ़ या कभी किसी सरकारी अभियान के नाम पर। इनका फोन नम्बर सार्वजनीन किया जाता है। कई फोन नम्बर ऐसे होते हैं जिन पर कॉल मुफ्त में होता है। इनमें आठ-आठ घण्टे के लिए तीन पारियों में कार्मिकों की ड्यूटी भी लगाई जाती है।

इन नियंत्रण कक्षों का इस्तेमाल अफसर अपने हक में किस-किस तरह से करते हैं यह किसी से छिपा हुआ नहीं। कभी किसी ख़ास परिचित या नेताओं के सिफारिशी उस कार्मिक की ड्यूटी लगा दी जाती है जिसकी पोस्टिंग बहुत दूर हो, और घर के आस-पास या मुख्यालय पर तबादला नहीं हो रहा हो, इसे ऑब्लाईज करते हुए कंट्रोल रूम में लगा दिया जाता है ताकि जितना लम्बा चला सकें, उतना लाभ मिल जाए। मजे की बात यह कि हर जगह ऐसे कुछ चुने हुए कार्मिक होते हैं जो बार-बार इस गौरवशाली ड्यूटी का सुकून पाते रहते हैं।

अफसरां के घरों पर बेसिक फोन और मोबाइल पूरी तरह सरकारी खर्च पर चलते हैं फिर भी कई सारे अफसर ऐसे देखे गए हैं जो किसी काम से किसी भी दूसरे मातहत अधिकारी या कार्मिक से बात करना चाहते हैं, उन्हें सीधे फोन नहीं करते बल्कि इस कंट्रोल रूम पर तैनात कार्मिक से कहते हैं कि अमुक को मैसेज दो कि साहब से फोन/मोबाइल पर बात करे।

अपने मातहतों से सीधे बात करना इन अफसरों की शान के खिलाफ जो है क्योंकि इससे इन दंभी संप्रभुओं के रुतबे और अधीश्वरवादी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है।

इसका दूसरा पहलू यह भी है कि कई बार जब कंट्रोल रूम में कोई हार्ड ड्यूटी होती है तब अफसर किसी कार्मिक विशेष से अपनी कोई न कोई दुश्मनी निकालने के लिए कंट्रोल रूम में ड्यूटी लगाकर फंसा दिया जाता है।

फिर एक बार जो फंस गया, वह तभी इससे बाहर निकल सकता है जब अफसर का तबादला ही हो जाए। जिस कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित होता है उस कार्यालय के कार्मिक भी यही चाहते हैं कि किसी न किसी बहाने कंट्रोल रूम साल भर चलता रहे ताकि उनके काम भी दूसरों के मत्थे मढ़ दिए जाकर खुद मौज उड़ाते रहें।

नई पीढ़ी को निहाल करने में जुटे कई सरकारी जंवाइयों में कंट्रोल रूम का फोबिया पूरी नौकरी परवान पर रहता है। जो उन्मुक्तता अपने स्कूल में नहीं मिलती, वो यहां पा लेते हैं। फिर शीतकालीन और ग्रीष्मावकाश में पीएल का लाभ मिल जाए सो अलग। कई बार अपने आफिस या स्कूल में काम नहीं करने वाले सरकारी नुमाइन्दों के बॉस और स्टाफ भी ऐसे कार्मिकों को कंट्रोल रूम में लगा दिए जाने पर अपार प्रसन्नता का अनुभव करते हैं।

हर सरकारी कार्मिक की यह तमन्ना होती है कि प्रशासन के देवताओं का अधिक से अधिक सान्निध्य मिलता रहे, और इनके करीब आने तथा इनकी कृपा पाने के लिए कंट्रोल रूम बेस्ट माध्यम होता है, जहां रहकर किसी न किसी काम या बहाने अफसरों से निकटता स्थापित कर उनकी दया, करुणा और कृपा का लाभ पाने के तमाम उपलब्ध रास्तों का उपयोग संभव है।

कंट्रोल रूम में काम करते हुए इन्हें साहब के सर्वाधिक प्रियपात्र पीए साब की फीलिंग भी आती है। शासन-प्रशासन की मजबूती और इनसे जुड़े हुए महान लोगों की सेहत के लिए जरूरी है कि कंट्रोल रूम का यह कंसेप्ट अनवरत् जारी रहे। वे दिवंगत अधीश्वर धन्य हैं जिन्होंने कंट्रोल रूम का आविष्कार किया।