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साहित्य
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पाखण्डी महामूर्खों की विचित्र प्रजाति - मुँहठूँसिया भक्त

Deepak Acharya
Deepak Acharya
April 4, 2025
पाखण्डी महामूर्खों की विचित्र प्रजाति - मुँहठूँसिया भक्त

पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है कि भक्तों को अब भगवान की शक्ति पर भरोसा नहीं रहा। वे भगवान को विकलांग समझने लगे हैं तभी देश भर के कई मन्दिरों में यह देखा जाता है कि भक्त जो भी प्रसाद भगवान को चढ़ाने के लिए लाते हैं उसे भगवान के सम्मुख अर्पित कर देने के साथ ही भगवान के मुँह में ठूँस देते हैं।

इन भक्तां को लगता है कि भगवान शायद नीचे झुक कर प्रसाद ग्रहण करने या प्रसाद तत्त्व को दूर से ही ग्रहण करने में अक्षम हैं, इसलिए ये भक्त जो प्रसाद लाते हैं उन्हें भगवान के मुँह में दबाव से ठूँस देते हैं।

ख़ासकर हनुमान और भैरव के मन्दिरों में यह पागलपन अधिक देखने को मिलता है। ये भक्त पान के बीड़े को भी भगवान के मुँह में ठूँस देते हैं। ये पान के बीड़े और मिठाई, हलुवा आदि भगवान के मुँह में घण्टों ठूँसे पड़े रहते हैं। ठूँसे हुए प्रसाद और मिठाई भगवान की छवि को भी विचित्र स्वरूप दे डालते हैं।

विधान के अनुसार भगवान के सम्मुख प्रसाद रखकर घण्टी बजाकर नैवेद्य मंत्रों का उच्चारण किया जाता है और इसके उपरान्त प्रसाद पाने योग्य हो जाता है। कोई भी दैव प्रतिमा हो, वह प्रसाद के सूक्ष्म तत्त्व को ही ग्रहण करती है। लेकिन महामूर्ख भक्तों का पागलपन और आडम्बर इतना अधिक हावी रहता है कि प्रसाद चढ़ाया नहीं बल्कि ठूँसा जाता है, जैसे कि भगवान विकलांग हों, खुद की शक्ति से प्रसाद प्राप्त नहीं कर पाते हों या शिशु हों।

पता नहीं इन मूर्ख भक्तां को यह पागलपन कौन सिखाता है। और तो और मन्दिरों के पुजारी भी पैसों, मिठाई आदि के लोभ में इन भक्तों को कुछ कह पाने का साहस नहीं कर पाते। मन्दिरों को आवक का जरिया मानते हुए भक्तों के पैसों से अपनी दुकानदारी चलाने वाले महन्त, बाबा या पण्डित भी इन भक्तों को कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हैं।

देश का कोई सा इलाका हो, हर जगह ऐसे मन्दिर मिल ही जाएंगे, जहां मूर्तियों के मुँह में कोई न कोई प्रसाद ठूँसा हुआ मिलेगा ही। भगवान की मूर्ति के मुँह में ठूँसे हुए प्रसाद की वजह से भगवद् मूर्ति की क्या स्थिति होती है, इसकी कल्पना करना कठिन नहीं है। पता नहीं सनातन परम्पराओं में घुस आया यह पागलपन कब दूर होगा। यह पागलपन धर्म और शास्त्र के पूर्णतया विरूद्ध है और इस कुप्रवृत्ति पर तत्काल रोक लगनी चाहिए।