
देश-दुनिया में इंसानों की कई सारी तरह-तरह की प्रजातियों में कई प्रकार की विलक्षण मेधा-प्रज्ञा और बहुआयामी प्रतिभाएं पायी जाती हैं।
इन्हीं में कई प्रजातियां हैं जो सर्वत्र विद्यमान हैं और अपने कारनामों, करामातों, करतूतों और हरकतों की वजह से हमेशा चर्चाओं में रहा करते हैं।
बतरसिया और बतंगडिया बातूनी किस्म के जीवों को जहां बातें करते रहने में मजा आता है वहीं संदेशवाहक किस्म के प्राणियों को नए-नए संदेश प्रसारित करने और अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में अनिर्वचनीय आनन्द आता है।
इन्हीं में विचित्र इंसानों की एक किस्म है - मरण खबरी। अपने समाज से लेकर मोहल्ले, वार्ड, क्षेत्र और जिले से लेकर आस-पास के इलाकों में कहीं भी किसी का राम नाम सत्य हो जाए, इसकी पहली सूचना इन्हीं जागरुक संदेशवाहकों से मिलती है।
तब लगता है कि ये ही वे लोग हैं जो पूर्व जन्म में संदेश पहुंचाने वाले कबूतर थे अथवा राजा-महाराजाओं के जमाने के डाकिये।
इन खबरियों की जन्म कुण्डली में पता नहीं ऐसे कौन से ग्रह-नक्षत्र होते हैं जिनकी वजह से इन्हें ताजातरीन सूचनाएं अपने आप प्राप्त होती रहती हैं, और वे भी बिना किसी प्रयास के। जैसे कि खबरों को हमेशा हर पल इन्हीं की तलाश बनी रहती है।
हर क्षेत्र में चन्द ख़ास लोग ऐसे होते ही हैं जिन्हें मौत-मरण की खबरें पहुंचाने में सबसे आगे माना जाता है। इनका नेटवर्क जबर्दस्त सुपर स्पीड वाला होता है। कई लोग तो इनके पावन दर्शन होते ही समझ जाते हैं कि किसी न किसी के दिन पूरे हो चुके हैं।
इनका आगमन ही इस बात का प्रतीक हो जाता है कि कोई न कोई ऊपर पहुंच गया है। दूर से आते हुए ये यदि मुँह लटकाये गमगीन दिखें तो लोग समझ जाते हैं कि आज फिर कोई न कोई टपक गया है।
दूर से आते देख इनके चेहरे पर मुस्कुराहट दिखे तो लोग समझ जाते हैं कि आज इनका परम्परागत सुकूनदायी कोटा पूरा नहीं हो पाया है, कोई परमधाम के लिए प्रस्थान नहीं हुआ।
‘सबसे आगे हम, आपको रखे आगे’ जैसे जुमलों वाले टीवी चैनल नहीं थे तब भी ये खबरी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। इन्हें अपने जीवन में सर्वाधिक सुकून का अनुभव तभी हो पाता है जब किसी न किसी के महाप्रयाण की खबर सबसे पहले कई-कई लोगों तक पहुंचाने में कामयाब हो जाएं।
कोई रास्ते में मिल जाए, तो अच्छा है, वरना किसी न किसी परिचित के घर पहुंचकर भी मरण संदेश पहुंचाने में ये पीछे नहीं रहते। इनका मरण खबरिया फोबिया अधिकाधिक लोगों तक पहुंचकर और अधिक आनन्द की वृष्टि करने वाला हो उठता है। न प्रभात देखते हैं, न रात। इनका एक ही उद्देश्य यही रहता है कि किसी न किसी के मरने की जो खबर मिली है उसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
दिवंगत लोगों की जितनी कृपा पितर होने के बाद अपने परिवारजनों पर नहीं होती, उससे कई गुना अधिक कृपा और आशीर्वाद इन पितरों का मरण खबरियों पर बरसता है जो कि इनके मरने की खबर पहुंचाकर ज्यादा से ज्यादा लोगों की श्रृद्धान्जलियों और संवेदनाओं को उनकी आत्मा तक पहुंचाकर आत्मतोष का अहसास कराते हैं।
आज के जमाने में ये मरण खबरी धन्य हैं जो अवैतनिक रूप से सेवा एवं परोपकार की भावना से मृत्यु के संदेश सभी तक पहुंचाते रहते हैं और वे भी सबसे पहले। कितनी तेज सेवा है इनकी।
इन मरण खबरियों के दीर्घायु होने के साथ ही यशस्वी एवं समृद्धिशाली जीवन की कामना करना हम सभी का फर्ज है ताकि ये दीर्घकाल तक देहान्ती संदेशों के संवहन का पुण्य कार्य करते रह सकें।

