यों पहचानें - कौन दरिद्री और कौन है समृद्ध


किसी भी व्यक्ति के पास कितनी धन-दौलत है, यह जानने के लिए उसकी चाल को देखें। चलते समय जिस किसी के बूट, चप्पल या सैण्डिल जमीन पर घसीटते हुए आवाज करते हैं, उस व्यक्ति के पास पैसा कभी टिक नहीं सकता, चाहे वह कितना ही कमा ले, पैसा उसके हाथ से फिसलता रहता है और वह कभी भी पैसे वाला नहीं हो सकता। ऎसे व्यक्ति की मौलिक जीवनी शक्ति का भी उत्तरोत्तर क्षरण होता रहता है। इस किस्म के लोग जीवन भर समस्याओं और अभावों से ग्रस्त रहते हैं।
इसके उलट जो लोग हाथी की चाल चलते हैं अर्थात सलीके से पाँव रखते हुए आगे बढ़ते हैं तथा उनके चलते समय बूट-चप्पल किसी भी प्रकार से आवाज नहीं करते, उनके पास धन-दौलत और लक्ष्मी खूब रहती है। ऎसे लोगों की प्रतिष्ठा और प्रभाव भी बना रहता है।
तकिये का प्रयोग करें संभल कर
यह भी तथ्य है कि जिस तकिये पर किसी का एक बार भी बैठना हो जाता है उस तकिये को सिरहाने रखने से उस रात नींद नहीं आएगी और सवेरे मन-शरीर भारी-भारी रहेगा या बुरे स्वप्न आएंगे।
लोक परम्परा में पुराने जमाने से यह बात भी प्रचलित है कि तकिये पर बैठने से बैठने वाले पर कर्ज का बोझ बढ़ता रहता है।
हम सभी को एक बात यह अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि श्रुति परंपरा से हमारे समाज में बुजुर्गों से जो कुछ बातें सीखने मिलती हैं उनका प्रभाव शास्त्रों से भी बढ़ कर कारगर होता है। आज हम इसे स्वीकारें या न स्वीकारें, यह अपनी इच्छा है।
जो ज्ञान परम्परा, पूर्वजों और बुजुर्गों तथा अनुभवों से प्राप्त होता है उसके बारे में मित्रों को बताना चाहिए। अपनाएं या न अपनाएं, यह उनकी इच्छा पर निर्भर है। हम ज्ञान संवहन के अपने धर्म से न चूकें।
