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साहित्य
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जवानी

Deepak Acharya
Deepak Acharya
June 26, 2023
जवानी

कुछ लोग

कभी नहीं होते बूढ़े

मरते दम तक

ये जीते हैं

जवानी के भ्रम में,

कई किस्में है

इन बूढ़े ‘जवानों’ की

न कलमकार बूढ़ा होता है

न काले कोट वाले या सफेद पोश,

न ठेकेदार, समाजसेवी, चोर-डकैत, तस्कर

और नेता, अपराधी, दलाल,

न संत-महंत-मठाधीश

और सेठ-साहूकार

या धंधेबाज अफसर,

जनता की

जवानी छिनकर

ये लगे रहते हैं

खुद को जवान

बनाए रखने की जुगत में

मरते दम तक,

जवानी में ही बूढ़ी, अधमरी हो जाती है

तो बेचारी जनता

इनकी नाजायज ऐषणाओं का शिकार होकर।