किसी भी देवी या देवता के मंत्र जाप में मन नहीं लग रहा हो तो उस मंत्र के जितने अक्षर हैं उतनी बार अनुलोम-विलोम करते हुए जप करें।
फिर तीन बार प्राणायाम करते हुए साँस भीतर रोक कर और तीन बार साँस को बाहर रोक कर उसी मंत्र को मन में जपते रहें।
इससे नाड़ी शोधन के साथ ही नाड़ियों में मंत्र की ऊर्जा शक्ति का संचरण होने लगेगा और इससे मंत्र जप में मन भी लगेगा, आलस्य भी नहीं आएगा। देवी-देवता को प्रिय इत्र थोड़ी सी रूई में लगाकर उस मंत्र को 11 बार बोलकर रूई के फाहे को अभिमंत्रित कर लें और गोमुखी में डाल दें।

