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साहित्य
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बहुत जरूरी है आध्यात्मिक और नैतिक संस्कारों की पुनर्स्थापना

Deepak Acharya
Deepak Acharya
November 7, 2022

समाज में आज सब कुछ दिखाई देता है लेकिन जो नहीं दीख पा रहे हैं वे संस्कार ही हैं। इन्हीं की कमी से व्यक्ति व समुदाय से लेकर परिवेश और राष्ट्र तक में समस्याओं, कुटिलताओं, विद्रुपताओं और क्षुद्र ऐषणाओं के कई-कई मोहपाश अपना शिकंजा कसते जा रहे हैं।

संस्कारहीनता ही वह एकमात्र कारण है जिसने मनुष्य के उत्साह, ओज, संवेदना और स्वस्थ विकास की ललक को कहीं पीछे छोड़ कर आदमी को भोग-विलासिता का यंत्र बना दिया है। संस्कार मात्र के बीजारोपण से समाज को तमाम संकीर्णताओं और विषमताओं से मुक्ति का अहसास कराया जा सकता है।

आज जहाँ कहीं भी छोटे-मोटे ईमानदार प्रयास हो रहे हैं उनसे आशा की जानी चाहिए कि समाज में नैतिक, आध्यात्मिक मूल्यों और संस्कारों की पुनर्स्थापना के प्रयासों को सम्बल प्राप्त होगा और संस्कार सरिता का लुप्त प्रवाह पुनः सजीव व वेगवान होगा। समाज में संस्कारप्रधान जीवनी शक्ति का संचार वर्तमान पीढ़ी की सबसे बड़ी जरूरत है।

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