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साहित्य
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अजब-गजब - नीबू-मिर्च का बोलबाला, बुरी नज़र वाले तेरा मुँह काला

Deepak Acharya
Deepak Acharya
February 15, 2025

नकारात्मक शक्तियों का भय सभी को लगता है। चाहे वे धर्मनिरपेक्षता की भौकाल करने वाले नायक-महानायक हों या फिर उनके चेले-चपाटी छुटभैये मुफ्तखोर और चापलुसों की जमात में शामिल भेड़-बकरियों की रेवड। या फिर तथाकथित धर्मानुरागी, अंधविश्वासी एवं लूटेरे और टोनों-टोटकों से दुकानदारी चलाकर जैसे-तैसे कमा खाने वाले धंधेबाज, दलाल और लुच्चे-लफंगे अथवा नए-नए धार्मिक बनने वाले भोले-भाले, सरल और भ्रमित हो जाने वाले सज्जन।

ईश्वरीय सत्ता से अनभिज्ञ और आत्मबल से हीन सभी तरह के लोग डर-डर कर जीते हैं। जो जितना अधिक भ्रष्ट, व्यभिचारी, चोर-डकैत और लूटेरा होगा, कर्त्तव्यहीन, दुराचारी और हरामखोर होगा, उसका आत्म विश्वास खत्म रहेगा।

अब तो उद्घाटन अवसरों पर भी उसी तरह के नीबू और हरी मिर्च के टोटकों का इस्तेमाल होने लगा है जैसा कि दुकानों पर होता है।

हमें उन लोगों पर गर्व और गौरव का भान हमेशा होना चाहिए जो कि भवनों को बुरी नज़र से बचाने के लिए टोनों-टोटकों का इस्तेमाल करते-कराते हैं।

इन्हीं महान ज्ञानी-अनुभवी सिद्धों के कारण से ही हमारे भवन दीर्घकाल तक सुरक्षित एवं संरक्षित रहकर उपयोग में आते रहते हैं और ख़ास से लेकर आमजन तक सभी लाभान्वित होते रहते हैं।