दिन तभी सफल जब रोज हो कम से कम एक अच्छा काम

प्रत्येक दिन तभी सफल माना जा सकता है जब दिन में कम से कम एक अच्छा काम करें। इस अच्छे काम का कोई प्रचार नहीं होना चाहिए बल्कि उस काम के बारे में या तो हम जानें या ईश्वर। हर अच्छा कार्य पुण्य की श्रेणी में है और यह पुण्य ही है जो हमारे व्यक्तित्व को निखारने के साथ ही स्वर्ग में हमारे लिए श्रेष्ठ स्थिति का सृजन करता है।
किसी काम का प्रचार हो जाने पर वह कार्य हमें सांसारिक लोगों की भीड़ के बीच क्षणिक श्रेय दे सकता है किन्तु पुण्य में शामिल नहीं हो सकता। अतः प्रचार से हमेशा बचते रहते हुए न्यूनतम एक पुण्य कार्य जरूर करें। कुछ न हो सके तो रोजाना रात को शयन से पूर्व तक कम से कम एक अच्छा काम कर लिए जाने की आदत जरूर डालनी चाहिए।
यथासंभव गाय-कुत्ते को रोटी ही दे दें, पक्षियों को दाने और चींटियों को गुड़-शक्कर या कुछ मीठा चूर्ण डाल दें। इससे पुण्य का परिमाण बढ़ेगा, जिससे आत्म आनंद के साथ ही लौकिक एवं पारलौकिक जीवन सफलता का वरण करने लगेगा।
