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नाक से निकलने वाली साँस तय करती है भविष्य

Deepak Acharya
Deepak Acharya
January 15, 2022

स्वर विज्ञान अपने आप में दुनिया का महानतम ज्योतिष विज्ञान है जिसके संकेत कभी गलत नहीं जाते। शरीर की मानसिक और शारीरिक क्रियाओं से लेकर दैवीय सम्पर्कों और परिवेशीय घटनाओं तक को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाला स्वर विज्ञान दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण है।

स्वर विज्ञान का सहारा लेकर आप जीवन को नई दिशा-दृष्टि दे सकते हैं, दिव्य जीवन का निर्माण कर सकते हैं, लौकिक एवं पारलौकिक यात्रा को सफल बना सकते हैं। यही नहीं तो आप अपने सम्पर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति और क्षेत्र की धाराओं तक को बदल सकने का सामथ्र्य पा जाते हैं।

अपनी नाक के दो छिद्र होते हैं। इनमें से सामान्य अवस्था में एक ही छिद्र से हवा का आवागमन होता रहता है। कभी दायां तो कभी बांया। जिस समय स्वर बदलता है उस समय कुछ सैकण्ड के लिए दोनों नाक में हवा निकलती प्रतीत होती है। इसके अलावा कभी-कभी सुषुम्ना नाड़ी के चलते समय दोनों नासिक छिद्रों से हवा निकलती है। दोनों तरफ सांस निकलने का समय योगियों के लिए योग मार्ग में प्रवेश करने का समय होता है।

बांयी तरफ सांस आवागमन का मतलब है आपके शरीर की इड़ा नाड़ी में वायु प्रवाह है। इसके विपरीत दांयी नाड़ी पिंगला है। दोनों के मध्य सुषुम्ना नाड़ी का स्वर प्रवाह होता है।

अपनी नाक से निकलने वाली साँस को परखने मात्र से आप जीवन के कई कार्यों को बेहतर बना सकते हैं। सांस का संबंध तिथियों और वारों से जोड़कर इसे और अधिक आसान बना दिया गया है।

जिस तिथि को जो सांस होना चाहिए, वही यदि होगा तो आपका दिन अच्छा जाएगा। इसके विपरीत होने पर आपका दिन बिगड़ा ही रहेगा। इसलिये साँस पर ध्यान दें और जीवन विकास की यात्रा को गति दें। मंगल, शनि और रवि का संबंध सूर्य स्वर से है जबकि शेष का संबंध चन्द्र स्वर से। आपके दांये नथुने से निकलने वाली साँस पिंगला है। इस स्वर को सूर्य स्वर कहा जाता है। यह गरम होती है। जबकि बांयी ओर से निकलने वाले स्वर को इड़ा नाड़ी का स्वर कहा जाता है। इसका संबंध चन्द्र से है और यह स्वर ठण्ढा है।

शुक्ल पक्ष

प्रतिपदा, द्वितीया व तृतीया - बांया(उल्टा)LEFT

चतुर्थी, पंचमी एवं षष्ठी -दांया (सीधा)RIGHT

सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी -बांया(उल्टा) LEFT

दशमी, एकादशी एवं द्वादशी -दांया(सीधा) RIGHT

त्रयोदशी, चतुर्दशी एवं पूर्णिमा - बांया(उल्टा) LEFT

कृष्ण पक्ष

प्रतिपदा, द्वितीया व तृतीया दांया (सीधा) RIGHT

चतुर्थी, पंचमी एवं षष्ठी बांया (उल्टा)

सप्तमी, अष्टमी एवं नवमी दांया(सीधा) RIGHT

दशमी, एकादशी एवं द्वादशी बांया(उल्टा)

त्रयोदशी, चतुर्दशी, अमावास्या --दांया(सीधा) RIGHT

नोट -

1. सवेरे नींद से जगते ही नासिका से स्वर देखें। जिस तिथि को जो स्वर होना चाहिए, वह हो तो बिस्तर पर उठकर स्वर वाले नासिका छिद्र की तरफ के हाथ की हथेली का चुम्बन ले लें और उसी दि शा में मुँह पर हाथ फिरा लें।

2. यदि बांये स्वर का दिन हो तो बिस्तर से उतरते समय बांया पैर जमीन पर रखकर नीचे उतरें, फिर दायां पैर बांये से मिला लें और इसके बाद दुबारा बांया पैर आगे निकल कर आगे बढ़ लें।

3. यदि दांये स्वर का दिन हो और दांया स्वर ही निकल रहा हो तो बिस्तर पर उठकर दांयी हथेली का चुम्बन ले लें और फिर बिस्तर से जमीन पर पैर रखते समय पर पहले दांया पैर जमीन पर रखें और आगे बढ़ लें।

4 .यदि जिस तिथि को स्वर हो, उसके विपरीत नासिका से स्वर निकल रहा हो तो बिस्तर से नीचे नहीं उतरें और जिस तिथि का स्वर होना चाहिए उसके विपरीत करवट लेट लें। इससे जो स्वर चाहिए, वह शुरू हो जाएगा और उसके बाद ही बिस्तर से नीचे उतरें।

5. स्नान, भोजन, शौच आदि के वक्त दाहिना स्वर रखें।

6. पानी, चाय, काफी आदि पेय पदार्थ पीने, लघुशंका करने, अच्छे काम करने आदि में बांया स्वर होना चाहिए।

7. जब शरीर अत्यधिक गर्मी महसूस करे तब दाहिनी करवट लेट लें और बांया स्वर शुरू कर दें। इससे तत्काल शरीर ठण्ढक अनुभव करेगा।

8. जब शरीर ज्यादा शीतलता महसूस करे तब बांयी करवट लेट लें, इससे दाहिना स्वर शुरू हो जाएगा और शरीर जल्दी गर्मी महसूस करेगा।

9. जिस किसी व्यक्ति से कोई काम हो, उसे अपने उस तरफ रखें जिस तरफ की नासिका का स्वर निकल रहा हो। इससे काम निकलने में आसानी रहेगी।

10. जब नाक से दोनों स्वर निकलें, तब किसी भी अच्छी बात का चिन्तन न करें अन्यथा वह बिगड़ जाएगी। इस समय यात्रा न करें अन्यथा अनिष्ट होगा। इस समय सिर्फ भगवान का चिन्तन ही करें। इस समय ध्यान करें तो ध्यान जल्दी लगेगा।

11. दांये स्वर में देव तथा बांये स्वर में देवी उपासना जल्दी फलती है। सुषुम्ना स्वर में निष्काम ध्यान करें।

12. दिन में स्वर को बार-बार बदलने का अभ्यास करें। इससे जवानी बनी रहती है।

13. जिस दिन उत्तरायण का सूर्य हो उस दिन अर्थात मकर संक्रांति के दिन सूर्य स्वर होने से उत्तरायण के छह माह बढ़िया निकलते हैं और अकाल मृत्यु नहीं होती है।

इसी प्रकार दक्षिणायन के पहले दिन को उठने के समय चन्द्र स्वर होने से दक्षिणायन के छह माह अच्छे गुजरते हैं। कहा गया है - ‘‘कर्के चन्द्रा, मकरे भानु, जीवन मरण का प्रश्न है जानूं।’’ अर्थात कर्क का सूर्य हो उस दिन स्वर वाम होना चाहिए जबकि मकर का सूर्य होने के दिन स्वर दक्षिण होना चाहिए।

14. बीमारी या किसी भी कारण से सवेरे उठते समय निर्धारित तिथि का स्वर नहीं चल रहा हो, और काफी प्रयास के बाद भी उस वांछित स्वर नहीं हो, ऎसी स्थिति में जो भी स्वर चल रहा हो, उस तरफ की हथेली का चुंबन ले लें और उसी तरफ का पाँव आगे रखकर बिस्तर छोड़ देें।

यह ध्यान रहे कि दांया स्वर चलने पर दाहिना पांव आगे रखें जबकि बांया स्वर रहने पर पहले बांया पांव आगे रखें, उससे दाहिना पाँव मिलाएं तथा फिर बांया पाँव आगे रखकर आगे बढ़ जाए। किसी दिन कोई विशेष कार्य हो तो उस दिन बिस्तर छोड़ते समय जब पांव जमीन पर रखें तब बांये स्वर का दिन हो तो सम संख्या में 2, 4, 6 बार बांया पांव पहले आगे रखें। यदि दांये स्वर का दिन हो तब विषम संख्या में दांया पांव 3,5 या सात बार आगे कर बढ़ लें।

15. बांया स्वर सम तथा दांया स्वर विषम है।

16. पूजा-पाठ और ध्यान-साधना के लिए सुषुम्ना स्वर होना चाहिए। इसका अर्थ यह कि ये काम ऎसे समय हों जब नासिका में दोनों तरफ से हवा आ रही हो। ऎसे समय में ध्यान या अनुष्ठान, साधना आदि करने से गहरा ध्यान लगता है और आनंद आने के साथ ही सफलता जल्दी मिलती है।

यदि ध्यान में मन नहीं लग रहा हो तथा गहरा ध्यान करने की तीव्र इच्छा हो और उस स्थिति में सुषुम्ना नाड़ी नहीं चल रही हो तो सीधे खड़े हो जाएं और अपनी दोनों एड़ियों से कूल्हों पर प्रहार करें। इससे कुछ ही सैकण्ड में सुषुम्ना नाड़ी का प्रवाह आरंभ हो जाएगा।

17. रति के चरम पर स्वरों में संयोग से पुत्र या पुत्री की प्राप्ति सुनिश्चित होती है। पुत्र प्राप्ति के लिए पुरुष का दांया स्वर तथा स्त्री का बांया स्वर और पुत्री प्राप्ति के लिए पुरुष का बांया स्वर और स्त्री का दांया स्वर होना चाहिए।

18. स्वर की तिथि से वार का भी गहरा संबंध है। दांये स्वर की तिथि के दिन रविवार, मंगलवार और शनिवार हों तो उस स्वर का महत्त्व बढ़ जाता है। इसी प्रकार बांये स्वर की तिथि में सोमवार, बुधवार, गुरुवार या शुक्रवार हो तो इस दिन स्वर का प्रभाव दुगूना हो जाता है।

19. स्वरों के माध्यम से प्रेम और आत्मीय संबंधों में स्थायित्व और प्रगाढ़ता का निश्चय भी होता है। आप जिसे चाहते हैं उसके समीप जाने पर या हाथ मिलाते समय जो भी स्वर चल रहा हो, उसे अपने अंदर की तरफ ख्िंाचते हुए उसकी अगवानी करें। आपके कमरे में उसके पांव रखते ही अपना स्वर अन्दर ख्िंाच लें, इसी प्रकार उसके कुर्सी पर बैठते समय या हाथ मिलाते समय भी अपना जो भी स्वर चल रहा हो उसे अंदर की ओर खींचें। इससे आकर्षण बढ़ता है और ऎसे संबंधों मेें प्रगाढ़ता तथा स्थायित्व आता है।

20. जिससे आप घृणा करते हैं या जिसे नहीं चाहते हैं वे जब भी आपके सम्पर्क में आएं, आपसे हाथ मिलाएं, ऎसे समय अपनी जो भी साँस चल रही हो, उसे झटके से बाहर की ओर फेंक दें। इससे वह व्यक्ति थोड़े समय बाद ही वहाँ से चला जाएगा।

21. अपने किसी भी काम के लिए किसी के पास जाना पड़े तो उससे पहले स्वर देख लें। अच्छा सौम्य काम है तो इसके लिए बांया स्वर तथा क्रूर काम, शिकायत आदि के लिए दांया स्वर उपयुक्त रहता है। यदि ये स्वर पूर्ण चल रहे हों तो कार्यसिद्धि में सहायता प्राप्त होती है।

22. किसी से काम हो तो उसे अपने उसी तरफ रखें जिस तरफ अपनी साँस निकल रही हो। अर्थात् बांया स्वर होने पर उसे अपने बाँयी ओर रखें जबकि दाहिनी साँस होने पर उसे अपने दाहिनी ओर रखें। इससे पूर्ण सफलता मिलती है और जिससे काम हो, वह अपने अनुकूल बना रहता है।

23. जब भी कपड़े पहनें, उस तरफ से पहनना शुरू करें जिस तरफ से अपनी साँस का आवागमन हो। कपड़े हाथ में लेते तथा पहनते हुए साँस अन्दर की तरफ खींचें तथा ‘ॐ जीवं रक्ष ’ का उच्चारण करते हुए कपड़े पहनें। इससे ये वस्त्र अपने लिए हितकर बने रहते हैं तथा शरीर के लिए अभेद्य सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

24. वे लोग योगी होते हैं जिनके स्वर संकल्प मात्र से बदलने लगते हैं। ऎसे योगियों के स्वर दिन भर चन्द्र और रात भर सूर्य होते हैं।

25. एक हाथ से भारी वस्तु थोड़ी देर उठाए रखने पर दूसरी तरफ का स्वर अपने आप बहने लगता है। दांये हाथ से भारी वस्तु उठाए रखने पर बांया स्वर तथा बांये हाथ से भारी वस्तु उठाये रखने पर दांया स्वर शुरू हो जाता है।

26. कुर्सी पर बैठे-बैठे ही स्वर बदलना हो तो मुट्ठी भींच कर काख में दबा लें। दांये हाथ की मुट्ठी बांयी काख में दबाये रखने पर दांया स्वर तथा बांये हाथ की मुट्ठी भींच कर दांये हाथ की काख में दबाये रखने पर बांया स्वर शुरू हो जाता है।