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साहित्य
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मंत्र बल से करें कलह को शान्त

Deepak Acharya
Deepak Acharya
May 18, 2021

अशांति, संघर्ष और किसी भी प्रकार की तनातनी, झगड़ा आदि सब कुछ कलियुग का ही प्रत्यक्ष प्रभाव है।

अक्सर इस तरह की स्थितियां देखने में आती हैं जिनमें लगता है कि बिना कारण झगड़ा हो रहा है या संघर्ष की स्थितियां बढ़ गई हैं।

इस स्थिति में यदि कलियुग के प्रभाव को उस समय नियंत्रित कर दिया जाए तो कलह या विवाद को समाप्त किया जा सकता है।

इसके लिए जहां कहीं संघर्ष की स्थिति दिखे या झगड़ा हो रहा हो, उस समय नल-दमयन्ती पर केन्दि्रत इस मंत्र का मन ही मन जप करते रहें। इससे कलह नियंत्रित हो जाएगा।

दमयन्ती-नलाभ्यां तु नमस्कारं करोम्यहम्,

अविवादो भवेदत्र कलिदोष प्रशान्तये।

ऎकमत्यं भवेदेषां ब्राह्मणानां पृथग् धियाम्,

निर्वैरतां च जायेत संवादाग्ने ! प्रसीद मे ॥

इसका प्रयोग अपरिहार्य अवस्था में ही करें। अपने से संबंधित या समाज और राष्ट्र से संबंधित विषय हों, तभी इसका प्रयोग करें।

दुष्टों के आपसी संघर्ष में इसका प्रयोग कदापि न करें क्योंकि दुष्टों का दमन और समूल संहार दुष्टों के पारस्परिक संघर्ष से ही होना संभव है।