शुद्ध वायु, करे चिरायु
पृथ्वी का श्रृंगार है वृक्ष
वृक्ष कटा, जीवन मिटा
आज समय की यही पुकार, बच्चे दो और वृक्ष हजार
नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे, पेड़ लगाओ न्यारे-न्यारे
बंजर धरती करे पुकार, पेड़ लगा, करो श्रृंगार
कहते हैं सब वेद पुराण, बिन वृक्ष के नहीं कल्याण
पर्यावरण पर करो विचार, इसी में है जीवन का सार
पर्यावरण को संरक्षण देना, धरती माँ का मान बढ़ाना
पेड़ हमारी शान है, जीवन की मुस्कान है
जब पृथ्वी हो वन मय, तो जीवन हो अमृतमय
वर्षा को बुलाते पेड़, सावन में झुलाते पेड़
वृक्ष देते स्वच्छ वायु, सुखी जीवन लम्बी आयु
आओ अपनी भूल सुधारें, पर्यावरण का रूप निखारें
जन-जन को यही बताना है, पर्यावरण को शुद्ध बनाना है
पर्यावरण को शुद्ध बनाओ, जीवन में खुशहाली पाओ
जन-जन का हो एक ही नारा, पर्यावरण हो शुद्ध हमारा

