वर्तमान में कोरोना संक्रमण का प्रकोप जारी है। ऎसे में अपने स्वर पर नियंत्रण रखें।
वैशाख शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 12 मई 2021, बुधवार को है।
स्वर विज्ञान के अनुसार शुक्ल पक्ष के प्रथम दिन अर्थात् 12 मई की प्रभात में सूर्योदय के समय अपनी नासिका के बांये LEFT छिद्र से यदि साँस का आवागमन हो रहा होता है तब पूरा माह भर स्वास्थ्य के हिसाब से अच्छा रहता है और रोग नहीं होता।
बुधवार को सूर्योदय के समय ध्यान रखें कि अपना स्वर बांया LEFT ही हो।
बांया स्वर होने पर बिस्तर से उतरते समय जमीन पर पहले बांया LEFT पांव रखें, इसके बाद दांये RIGHT पांव को बांये पांव से मिलाएं, फिर बांये पांव को आगे रखकर आगे बढ़ जाएं। यानि की सीधी सी बात यह कि बिस्तर छोड़ने के उपरान्त अपना बांया पांव दो बार जमीन से छूना चाहिए।
जो लोग सूर्योदय से काफी समय पहले उठते हों, वे ध्यान रखें कि बांया स्वर हो तो बांया पांव दो बार जमीन पर रखकर आगे बढ़ जाएं। और यदि दांया स्वर चल रहा हो तो दांया पांव एक बार में ही जमीन पर रखकर आगे बढ़ जाएं।
लेकिन जब सूर्योदय होने वाला हो उससे कुछ मिनट पूर्व बांया स्वर शुरू हो जाना चाहिए और वह कम से कम एक घण्टा रहना चाहिए।
यदि प्रभात में जागरण के समय यानि सूर्योदय से कुछ मिनट पूर्व तक अपना स्वर बांया न हो तो इस स्थिति में दाहिनी करवट लेट जाएं, चन्द्रमा, पानी, बर्फ आदि का चिन्तन करें, अपने ईष्ट मंत्र का जप करें, इससे अपना स्वर बांया हो जाएगा। इसके बाद ही बिस्तर त्यागें और दो बार बांया पांव आगे रखकर चल पड़ें।
शुक्ल पक्ष की द्वितीया और तृतीया को भी बांया ही स्वर रहने पर घर-गृहस्थी और काम-धंधा माह भर अच्छा रहता है।
अतः कृपया बुधवार प्रभात में सूर्योदय काल में अपनी नासिका का स्वर बांया ही रहे, इस बात का विशेष ध्यान रखें।
यह भी ध्यान रखें कि रोजाना रात को बांयी करवट ही लेटें जिससे स्वर रात को दांया ही रहेगा। और रात को यदि सोते समय दांया स्वर होगा, तो अगले दिन प्रभात में स्वाभाविक रूप से वही स्वर होगा, जो कि उस तिथि विशेष को होना चाहिए।
इस समय कोरोना का खतरा मण्डराया हुआ है, ऎसे में स्वास्थ्य रक्षा के लिए वैशाख शुक्ल पक्ष प्रतिपदा (एकम) को सूर्योदय काल में हमारा स्वर बांया होना चाहिए।
आम तौर पर नासिका के दोनों छिद्रों से क्रमिक रूप से स्वर बदलते रहते हैं। एक-एक घण्टा बांया-दांया, दांया-बांया चलते रहते हैं। बांया स्वर चन्द्र है और यह चलने पर ही पानी, चाय, काफी आदि लिक्विड पदार्थ (द्रव) लेने का विधान है। जबकि दाहिने स्वर में भोजन का विधान है। ऎसा ही होने पर शरीर स्वस्थ रहता है।
स्वास्थ्य रक्षा के लिए यह भी ध्यान रखें कि स्वर के अनुकूल जीवन को ढालें, इससे कई सारे रोगों से मुक्ति प्राप्त होती है। कोई सी बीमारी अनुभव हो रही हो, अपनी नासिका का स्वर देखें और इसे बदल दें, अपने आप फरक पड़ जाएगा।
स्वास्थ्य का पाया मजबूत रखने के लिए स्वर को यत्नपूर्वक बार-बार बदलने का अभ्यास भी करते रहना चाहिए।
नासिका के दोनों ही छिद्रों से सांस निकलने की स्थिति में सांसारिक कर्म, यात्रा आदि नहीं करनी चाहिए और न ही अच्छे काम सोचें। इससे काम बिगड़ते हैं और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्वर के विषय में कुछ भी जानकारी या जिज्ञासा हो तो मेरे मोबाईल नम्बर - 9413306077 पर कभी भी, किसी भी समय बात कर सकते हैं।

