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साहित्य
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जीवन की मिठास देते हैं सांकरिया के भैरव जी

Deepak Acharya
Deepak Acharya
July 9, 2021

भंवरों ने छुड़ाए यहां दुश्मनों के छक्के

वागड़ अंचल श्रद्धा और आस्थाओं का ज्वार उमड़ाने वाला वह क्षेत्र है जहां हर कोना भक्तिभाव और विश्वास की धाराएं बहाता रहा है। डूंगरपुर और बांसवाड़ा दोनों जिलों में सैकड़ों श्रद्धा धाम हैं जहां लोगों की आस्थाओं का सहज ही दिग्दर्शनकिया जा सकता है। इन्हीं में है- बांसवाड़ा जिले की गढ़ी पंचायत समिति अन्तर्गत सांकरिया गांव के मुहाने भैरवजी धाम।

यहां नयातालाब की पाल के पास पुराने वट वृक्ष के तले भैरवजी का काफी पुराना आस्था स्थल है। इस स्थानक के प्रति क्षेत्रीयजनता की अपार आस्था है। लोक मान्यता है कि भैरवजी प्राचीन काल से इस इलाके में क्षेत्र रक्षा के प्रधान देवता रहे हैं जो रात्रि में अश्वारूढ़ होकर ग्रामवासियोंकी रक्षा करते हैं। इसके अलावा वे मनोकामनाएंपूरी करने वाले देवता के रूप में दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं।

खासकर इस इलाके से जो लोग काम-धन्धे व रोजगार के लिए अहमदाबाद, मुम्बई, बड़ौदा, रतलाम आदि शहरों तथा अरब देशों में जाते हैं वे जाने से पूर्व भैरवजी की इजाजत लेना नहीं भूलते। लोगों का पक्का विश्वास है कि भैरवजी के दर्शन-पूजन करने के बाद रोजगार के लिए की गई यात्रा सफल रहती है। इसी परम्परा में आज भी यहां के लोग रोजगार के लिए बाहर जाने से पूर्व भैरवजी की पूजा-अर्चना करते हैं।

गांव के वृद्ध बताते हैं कि पुराने जमाने में यहां धाड़ (आक्रमण दल) आयी तब भैरवजी की कृपा से हजारों-लाखों भ्रमर उड़े और इन भंवरों ने इन आक्रमणकारियोंको दूर तक खदेड़ डाला। इसके बाद फिर किसी ने ऎसी जुर्रत नहीं की। इसके बाद से भैरवजी की कीर्ति दूर-दूर तक है।(यह लेख कुछ वर्षों पूर्व लिखा गया है।)