रहस्य की बात - हनुमान चालीसा है अपने आप में सिद्ध

हनुमान चालीसा अपने आप में सिद्ध है। इसे सिद्ध करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती क्योंकि सदियों से असंख्य बार इसके निरन्तर उच्चारण से इसका एक-एक अक्षर, शब्द और वाक्य स्वतः सिद्ध हो गया है। इसलिए जब भी भक्तिभावपूर्वक हम इसका पाठ करते हैं तब इसका प्रभाव ब्रह्माण्ड से लेकर अपने शरीर पर पड़ना और महसूस होना आरंभ हो जाता है। परम्परा से जो हनुमान चालीसा चल रही है वही सिद्ध है। इसमें अक्षरों या शब्दों का तनिक भी फेरफार स्वीकार्य नहीं है क्योंकि इसका हरेक अक्षर सिद्ध है।
केवल यही चालीसा है जो सिद्ध है और दैवीय है। शेष समस्त प्रकार की चालीसाएं सामान्य भक्तों या भजन बनाने वालों द्वारा सायास शब्द संयोजन और वाक्य मिश्रण कर बनाई गई हैं। इन चालीसाओं का कोई वैदिक या पौराणिक आधार कहीं देखने में नहीं आता।
इसलिए मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि हनुमान चालीसा के अलावा किसी भी प्रकार की किसी अन्य देवी-देवता की चालीसा में समय व्यर्थ खपाने की बजाय उस देवी-देवता से संबंधित नाम जप, पाठ और स्तोत्र आदि परम्परागत पद्धतियों को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि सदियों और युगों से इनका प्रयोग होता रहा है और इनमें अपार ऊर्जा होती है। भजन या स्मरण के उद्देश्य से इन मनुष्यकृत चालीसाओं का पाठ किया जा सकता है।
