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साहित्य
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इतिहास बोलता है - बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी ....

Deepak Acharya
Deepak Acharya
August 30, 2021

बात जैसलमेर की है। बहुत पुरानी है। उन दिनों जैसलमेर में श्री गणेशराम केवलिया जनसंपर्क अधिकारी हुआ करते थे।

एक बार नई दिल्ली में कोई पुस्तक मेला लगा। इसे देखने पीआरओ श्री केवलिया पहुंचें। संयोग से सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के तत्कालीन निदेशक श्री राजेन्द्रशंकर भट्ट भी उसी दिन दिल्ली पहुंचे। उन्होंने श्री गणेशराम केवलिया को देखते ही पहचान लिया और पूछा - केवलिया आप यहाँ कैसे ।

इस पर श्री गणेशराम केवलिया ने छूटते ही झूठ बोल दिया - हू ईज केवलिया, आई एम नोट केवलिया। स्वयं निदेशक भी चकित रह गए अपने पीआरओ के इस सरासर झूठ को देखकर ।

इस घटना के तत्काल बाद श्री गणेशराम केवलिया सीधे जैसलमेर आ गए।

उधर श्री राजेन्द्रशंकर भट्ट भी जयपुर निदेशालय आ गए और फोन किया तो केवलिया से ही बात हुई। श्री भट्ट को भी आश्चर्य हुआ कि यह पीआरओ दिल्ली में था, उनकी आँखों के सामने झूठ बोल गया और यहाँ भी। है न बात जोरदार।

( संदर्भ - जैसा कि कई वर्षों तक जैसलमेर के पीआरओ रहे स्व. शंभूदान रत्नू जी ने मुझे जनसंपर्क अधिकारियों की महानताओं और विलक्षण प्रतिभाओं भरे अजब-ग़ज़ब और रोचक किस्सों से भरी कहानियों के दौरान सुनाया)