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साहित्य
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स्वामी विवेकानंद के विचारों को करें आत्मसात

Deepak Acharya
Deepak Acharya
January 12, 2022

स्वामी विवेकानंद का उपदेश

जैसलमेर के गांधी दर्शन में महात्मा गांधी प्रदर्शनी में स्थापित पट्ट पर स्वामी विवेकानंद के ये विचार आज के युग में प्रासंगिक और अनुकरणीय हैं।

स्वामी विवेकानंद का स्मरण कर लेना, उनके बारे में भाषण दे डालना और उनकी मूर्तियों व तस्वीरों पर पुष्पहार चढ़ाकर पब्लिसिटी कर देना ही काफी नहीं है।

स्वामी विवेकानंद के बारे में बोलने का अधिकार उन्हीं को है जो उनके विचारों और उपदेशों तथा जीवन व्यवहार को अपनाते हैं, उनकी मूर्ति और तस्वीरों पर माल्यार्पण का अधिकार उन्हीं को है जो उनके विचारों व स्वभाव पर अमल करते हैं।

आईये स्वामी विवेकानंद जी की जयन्ती पर हम संकल्प लें उनके जीवन और आदर्शों को अपने स्वभाव तथा मन-कर्म एवं वचन में उतारने का।

स्वामी विवेकानंद उवाच -

असफलताओं की चिन्ता मत करो, वे बिल्कुल स्वाभाविक हैं, उनके बिना जीवन ही क्या है? जीवन में यदि संघर्ष न रहे तो जीवित रहना ही व्यर्थ है। इसी संघर्ष में है जीवन का काव्य। संघर्ष और त्रुटियों की परवाह मत करो। असफलताएं छोटी-छोटी फिसलने हैं। आदर्श को सामने रखकर हजार बार आगे बढ़ने का प्रयत्न करो। यदि तुम हजार बार भी असफल रहो, तो भी एक बार फिर प्रयत्न करो।