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साहित्य
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तंत्र-मंत्र मर्मज्ञ एवं सिद्ध साधक पं. त्रम्बकेश्वर ठाकोर

Deepak Acharya
Deepak Acharya
October 23, 2025

सेवा और परोपकार ही है जीवन लक्ष्य, लोकमंगल के लिए समर्पित विभूति

दिखने में अत्यन्त साधारण सा सादगीपूर्ण एवं मिलनसार व्यक्तित्व हैं श्री त्रम्बकेश्वर ठाकोर, लेकिन पौराणिक और धार्मिक ज्ञान, कर्मकाण्ड, दक्षिण और वाम मार्गी साधना पद्धतियों, साबर मंत्र विज्ञान, परंपरागत टोनों-टोटकों के मामले में उनका कोई सानी नहीं है।

सभी पुराणों का अध्ययन कर चुके पं. त्रम्बकेश्वर ठाकोर का पौराणिक ज्ञान अपरिमित होने के साथ ही वे पौराणिक परम्परा के कई प्रयोगों और अनुष्ठानों के व्यवहारिक प्रयोग कर चुके हैं। हर पर्व, उत्सव और व्रत से संबंधित विधान और विधि के वे अच्छे जानकार हैं और उन्हीं नियमों और आदर्शों का पालन करने के हामी रहे हैं।

उनका व्यक्तित्व साधना से परिपूर्ण है। तप-तपस्या का तेज उनके दैदीप्यमान चेहरे से साफ लकता और छलकता हुआ देखा जा सकता है। 74 वसन्त पार श्री ठाकोर बावजी रामायण और रामभक्ति के जीवन्त साधक हैं जिन्होंने अब तक 77 बार सम्पूर्ण रामचरित मानस का पाठ कर लिया है और इस समय 78 वीं बार श्रीरामचरितमानस का पाठ चल रहा है।

इसके अलावा भगवान राम के अनन्य भक्त श्री ठाकोर 2 करोड़ से अधिक राम नाम कर चुके हैं और रोजाना दस से पन्द्रह हजार बार राम नाम का जप उनकी दैनिक जीवनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

शिक्षा विभाग में बेहतरीन और लोकप्रिय शारीरिक शिक्षक के रूप में लम्बी राज्य सेवाओं के दौरान उन्होंने अपने कर्मयोग के बहुआयामी पक्षों का परिचय दिया है वहीं सेवानिवृत्ति के उपरान्त भी वे निरन्तर रचनात्मक गतिविधियों में जुड़े हुए समाज की सेवा कर रहे हैं।

अनेक संस्थाओं में वे सक्रिय रचनात्मक कार्यकर्ता होने के साथ ही कहीं मार्गदर्शक और कहीं संरक्षक या सलाहकार के रूप में उनकी भूमिका को सर्वत्र आदर-सम्मान और श्रृद्धा के साथ प्रतिष्ठा प्राप्त है। ये संस्थाएं भी उनका स्नेह और निर्देशन-मार्गदर्शन पाकर अभिभूत हैं।

गायत्री मण्डल में उन्हें सलाहकार के रूप में जाना जाता है। कुछ दशक पूर्व उनके सक्रिय मार्गदर्शन में श्री पीताम्बरा आश्रम में अभेद्य चहारदीवारी निर्माण का जो सुदृढ़ कार्य हुआ, उसकी सराहना किए बिना कोई रह नहीं सकता।

उनका मानना है कि दुनिया की हर समस्या का समाधान उनके हाथ में है। उनके पास ऐसे टोने-टोटकों और विद्याओं का भण्डार है, जिनका इस्तेमाल कर इंसान अपने भाग्य को सँवार सकता है। किसी भी किस्म के छोटे-बड़े या कितने ही प्रभावशाली शत्रु का दमन एवं शमन कर सकता है। इनके सारे प्रयोग आम इंसान भी कर सकता है, जिनमें न कोई खर्च होता है, न ज्यादा झंझट।

वे बताते हैं कि पुराने नुस्खों, टोने-टोटकों और धार्मिक प्रयोगों के माध्यम से खुशहाली लाने के उपायों पर वे एक किताब भी लिख रहे हैं जो दुनिया में धमाल मचाने के काबिल होगी। सभी के कल्याण और खुशहाली की धाराओं को मजबूती देगी।

दश महाविद्याओं में शामिल भगवती बगलामुखी पीताम्बरा की साधना से लेकर कई दुर्लभ साधनाओं और अचूक प्रयोगों में माहिर पं. त्रम्बकेश्वर ठाकोर की रुचि और श्रद्धा को देख कर ही जाने-माने तंत्राचार्य एवं कर्मकाण्डी स्व. पं. लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (भाईसाहब) ने उन्हें बगलामुखी साधना पर ऐसी पुस्तक भेंट की है जो उन्हें किसी सिद्ध संत-महात्मा ने दशकों पूर्व दी थी।

इस ग्रंथ को आज भी वे श्रद्धा के साथ सहेज कर रखे हुए हैं। पं. ठाकोर का मानना है कि इस साधना की वजह से उनमें कई दिव्य शक्तियों का संचार हुआ है और इसी से र्प्रेरित होकर अब वे लोक कल्याण का मार्ग अपना चुके हैं। अपने जीवन को उन्होंने लोकमंगल के लिए समर्पित कर रखा है।

अपने विनम्र व्यक्तित्व, सरल और सहज व्यवहार, वाणी माधुर्य और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण ही है जिसकी वजह से आज वे अजातशत्रु और सर्वस्पर्शी हैं।

पं. श्री त्रम्बकेश्वर ठाकोर जैसी छिपी हुई प्रतिभाएं अपने भीतर ज्ञान और पुरातन मंत्र-तंत्र विज्ञान का खजाना समेटे हुए हैं। उनकी इन विधाओं के बहुत से लोग कायल हैं और उनका शिष्यत्व पाने को उतावले रहते हैं। उनकी शिष्य परंपरा निरन्तर विस्तार पाती जा रही है।

माँ पीताम्बरा के अनन्य भक्त एवं साधक पं. श्री त्रम्बकेश्वर ठाकोर जन सेवा के लिए समर्पित हैं। हर वर्ग और हर क्षेत्र के जिज्ञासु और भक्त उनके प्रशंसक हैं जिन्होंने आपसे मिलकर कुछ न कुछ पाया और जीवन के सुनहरे अनुभवों का साक्षात् किया। और सबसे खूबसूरत बात यह कि वे किसी से कोई दान-दक्षिणा या किसी भी तरह का कोई उपहार स्वीकार नहीं करते। उनकी सभी सेवाएं पूरी तरह निःशुल्क ही रहती हैं।

सहज और सरल सेवाव्रती और परोपकारी इतने कि कोई भी उनसे सम्पर्क कर आत्मीयता का अनुभव करता हुआ अपनी समस्या का समाधान पा लेता है। उनका मोबाइल नम्बर है - 9461118555

वागड़ धरा ऐसे साधकों को पाकर गौरवान्वित है। वे बताते हैं कि साधना से सब कुछ पाया जा सकता है। अपने अनुभव बताते हुए वे कहते हैं कि उन्होंने हर सफलता साधना से पायी है और भगवान से जब-जब भी किसी कामना को लेकर प्रार्थना की, भगवान ने सुनी और भरपूर दिया है। ( जैसा कि उनके शिष्यों ने बताया।)