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साहित्य
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जिन्दाबाद भाई जिन्दाबाद, कचराछाप जिन्दाबाद

Deepak Acharya
Deepak Acharya
February 22, 2025

हिंसा से कम नहीं है फालतू की पोस्ट करना, कचरा परिवहन से दूर रहें

आत्म अनुशासन सर्वोपरि है। पर बुद्धिजीवियों की सबसे बड़ी समस्या आजकल यह हो गई है कि कुछ बिरलों को छोड़कर उनके पास कुछ नया और मौलिक, स्व सृजित है ही नहीं, इसलिए परायी सामग्री को इधर से उधर आयात-निर्यात करते हुए विद्वत्ता और ‘सबसे पहले हम’ जैसा दम भरने लगे हैं।

असली इंसान को एक बार कह दो तो समझ जाता है लेकिन आम तौर पर देखा गया है कि नकलची स्वभाव वाले लोग इतने फालतू होते हैं कि उन्हें दूसरों के समय का मोल नहीं पता, ये जिस ग्रुप में होते हैं वहां नकलची बर्ताव करते हुए कचरे का परिवहन करते रहते हैं, जैसे कि इन्हें अवैतनिक मेहतर के रूप में नियुक्ति दे दी गई हो।

रोना आता है और शर्म भी आती है उन लोगों पर जो बार-बार कहने के बावजूद कचरा परिवहन करते रहते हैं। समाज में यों भी वास्तविक विद्वानों की संख्या कम होती जा रही है, ऐसे में ये फालतू की पोस्ट धड़ाधड़ डालने वाले लोग दुर्लभ सामग्री और विचारों का भी कबाड़ा कर दिया करते हैं।

इन्हीं सामग्री चोरों-डकैतों और आयात-निर्यातकों के कारण विद्वजन और समझदार लोग ग्रुप छोड़ना बेहतर समझते हैं और पलायन कर जाते हैं, जिसका नुकसान दूसरे गंभीर लोगों को भुगतना पड़ता है।

हमारी स्थिति यह है कि हम भगवान द्वारा प्रदत्त मौलिक मेधा-प्रज्ञा और बुद्धि का उपयोग करना नहीं चाहते बल्कि जो कहीं से आया, अच्छा लगा, उसे दूसरे ग्रुपों में उण्डेल दिया करते हैं और इस तरह हम हमारी छद्म बौद्धिक छवि को औरों पर अतिक्रमित कर अपने आपको सर्वप्रथम और सर्वोपरि सत्ता स्थापित करने की प्रतिस्पर्धा में खुद को विजेता मानकर आत्म मुग्ध हो उठते हैं।

ग्रुप बनाने के उद्देश्य और ग्रुप के लिए उपयोगी सामग्री के चयन से भिज्ञ होते हुए भी हम अपनी मनमानी करना जारी रखते हैं और हर ग्रुप का इस्तेमाल अपनी छवि चमकाने तथा वैचारिक कचरे को थोपने में लगे रहते हैं।

जबकि होना यह चाहिए कि जिस ग्रुप का जो उद्देश्य है उसी के अनुरूप सामग्री का चयन कर परोसी जानी चाहिए ताकि अपनी किसी भी पोस्ट के कारण दूसरों को कष्ट का अनुभव न हो। अवांछित पोस्ट किसी परमाणु बम गिराने से कम नहीं है और इससे हिंसा का पाप भी लगता है।

बार-बार चेतावनी के बावजूद विभिन्न ग्रुप्स में अप्रासंगिक सामग्री, फोटो, वीडियो आदि पोस्ट्स से ग्रुप के दूसरे सदस्यों को परेशानी होती है क्योंकि बहुत सारे ग्रुप मेम्बर कई सारे ग्रुप्स से जुड़े होते हैं और ऐसे में इनके पास एक ही प्रकार की सामग्री बार-बार आती रहती है और इससे इन्हें जो परेशानी होती है उसे वे लोग नहीं समझ पाते जो कि नितान्त फालतू हैं और दिन भर सोशल मीडिया पर भिड़े रहकर धड़ाधड़ पोस्ट करते रहते हैं।

इनमें से कोई सी पोस्ट इनकी अपनी मौलिक नहीं होती, केवल फॉरवर्डिंग और कॉपी-पेस्ट कर्मचारी के रूप में लगे रहते हैं। असली इंसान एक बार समझा दिए जाने के बाद कभी भी दुबारा गलती नहीं करते। लेकिन वर्णसंकरों, उन्मादियों, होशगाण्डियों और आधे-अधूरे संस्कारहीन लोगों का कोई भरोसा नहीं रहता। ये कभी भी कुछ भी कर सकते हैं। ईश्वर बचाए इन वज्रमूर्खों से।

सोशल मीडिया पर इन सामग्री परिवहन करने वालों के कारण से कई ग्रुप चल नहीं पाते और लोग परेशान होकर छोड़ देते हैं। सोशल मीडिया पर नकल और सामग्री परिवहन के मामले में हमने बन्दरों और सूअरों तक को पीछे छोड़ दिया है। भेड़ों की रेवड़ की तरह सारे के सारे एक-दूसरे के पीछे लगे हुए हैं, और लोग जैसा करते हैं, वैसा हम करते चले जाते हैं। मौत की घड़ी आ जाने तक यह पता नहीं चलता कि जो कर रहे हैं वह कितना सही और उचित है। एक-दूसरे की देखादेखी आत्मप्रचार और सस्ती प्रतिष्ठा पाने पूरी की पूरी भीड़ उमड़ी हुई पड़ी है।

पता नहीं कब हमारे भीतर का इंसान जगेगा और आत्म अनुशासन की मर्यादा में रहकर ऐसे कर्म करेगा कि किसी को हमारे कारण परेशानी न हो, सभी को हमारे मन, वचन एवं कर्म से प्रसन्नता हो।