व्यक्तित्व में निखार लाने अपनाएं नियमित साधना

जीवन में साधना की नियमितता और अनिवार्यता बहुत जरूरी है। साधना से व्यक्तित्व निखरता है और लौकिक व अलौकिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की सहज क्षमता प्राप्त होने लगती है। इसलिये प्रत्येक व्यक्ति को रोजाना कुछ न कुछ समय आत्मचिंतन, ईश्वर स्मरण और साधना में लगाना ही चाहिए।
प्रत्येक प्राणी ईश्वर का ही अंश है और यदि वह इस सत्य को जान ले तथा दैवत्व एवं दिव्यत्व भरे आचरण करे तो उसके भीतर का ईश्वरत्व अपने आप प्रकट होने लगता है। इसके लिए जीवन में शुचिता और नियमित साधना पहली आवश्यकता है।
विद्वानों और साधकों को चाहिए कि वैदिक और शास्त्रीय विधि से भरी साधनाओं पर क्रमबद्ध पुस्तकों को प्रकाशन करें और जिज्ञासुजनों को मार्गदर्शन देते हुए अपने सान्निध्य में व्यवहारिक साधना विधि में दक्ष करें। साधनाओं के माध्यम से वैयक्तिक से लगाकर पारिवारिक, सामाजिक और परिवेशीय महापरिवर्तन लाया जा सकता है।
रचनात्मक परिवर्तन लाने में साधनाओं के इस्तेमाल पर बल दिया जाना चाहिए। आज चतुर्वेद परम्परा को संरक्षण देने के लिए वास्तविक प्रयासों की आवश्यकता है। इसके लिए गुरुकुल पद्धति से शिक्षण केन्द्र आरंभ होने चाहिएं।
