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साहित्य
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इनसे तो लाख दर्जा अच्छे हैं भिखारी और पागल

Deepak Acharya
Deepak Acharya
December 30, 2021

अपने आस-पास और साथ रहने और काम करने वालों में खूब सारे ऎसे हैं जिन्हें देख कर दया भी आती है और घृणा के साथ गुस्सा भी। ये लोग अपने से ऊपर वाले भी हो सकते हैं और नीचे वाले भी। साथ वाले भी हो सकते हैं और आस-पड़ोस वाले भी। अब इन्हें कहीं ढूँढ़ने नहीं जाना पड़ता। सब जगह पाए जाने लगे हैं ऎसे किरदार।

अव्वल दर्जे के ये नीच लोग हर काम पराये पैसों से करना चाहते हैं। पैसों, मुफतिया खाने-पीने और ऎय्याशी के इन्तजामों को हासिल करने के लिए किसी भी हद तक नीचे गिर जाने को हमेशा तैयार रहते हैं। इनमें न संवेदनशीलता है, न मानवता। न अपने कुल-वंश का कोई स्वाभिमान। हरामखोरी और कामचोरी करते हुए, औरों को बेवकूफ बनाते हुए जिन्दगी को भुनाते रहना इन लोगों की सबसे बड़ी खासियत है जिसके सहारे वे लूट-खसोट, धींगामस्ती और चापलुसी करते हुए अपने आपको परम पूज्य और महान बनाए रखने का भ्रम पाले रहते हैं। विनम्रता, शालीनता और गांभीर्य भावों के मुखौटै धारण करने वाले इन हिंसक और भूखे भेड़ियों को यकायक देखकर इनके कुटिल चरित्र का पता नहीं चलता।

इन लोगों के नीचता भरे स्वभाव, हीन हरकतों और परजीवी मनोवृत्ति को देखकर शर्म आती है और यह कहने को जी चाहता है कि - हे भगवान ! ये किस दृष्टि से इंसानी खोल को पाने लायक थे। ये लोग अपने आपको चाहे कितना महान, बुद्धिमान और कर्मयोगी मानते रहें, लेकिन इनके साथ वाले, आस-पास वाले और सारे के सारे परिचित-सम्पर्कित हमेशा यही प्रतीक्षा किए रहते हैं कि कब इनका आकस्मिक और असामयिक राम नाम सत्य हो जाए और पृथ्वी इन नालायकों, नुगरों और पिशाचों के भार से मुक्त हो। अपने आस-पास भी खूब सारे ऎसे हैं। दिमाग पर जोर डालिएं और सूचीबद्ध करते हुए इनके लक्षणों, स्वभाव और गुणधर्म को जानने-पहचानने और समझने की कोशिश करें।